Haryana Strike News: हरियाणा में पिछले करीब एक महीने से जारी सफाई कर्मचारियों, सीवरमैनों और अग्निशमन कर्मचारियों की हड़ताल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य सरकार ने आंदोलन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 23 हड़ताली अग्निशमन कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों को भी ड्यूटी पर लौटने के लिए अंतिम चेतावनी जारी की गई है। सरकार का कहना है कि आवश्यक सेवाओं में लंबे समय तक हड़ताल से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। यदि कर्मचारी तय समय तक काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
23 अग्निशमन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त
अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा निदेशालय ने कुल 23 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इनमें 13 कर्मचारी पालिका रोल पर कार्यरत थे, जबकि 10 कर्मचारी हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के माध्यम से नियुक्त किए गए थे। विभाग का आरोप है कि ये कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे और विभागीय कार्य प्रभावित हुआ।
सफाई कर्मचारियों को सरकार का अल्टीमेटम
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और जिला नगर आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि हड़ताली सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों की 5 सितंबर तक ड्यूटी पर वापसी सुनिश्चित की जाए। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद भी अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सेवा नियमों और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) 1974 का भी हवाला दिया है।
हड़ताल से शहरों में बिगड़ी सफाई व्यवस्था
करीब एक महीने से जारी हड़ताल का असर प्रदेश के कई शहरों में साफ दिखाई दे रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठान प्रभावित होने से कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और अन्य शहरों में नियमित सफाई प्रभावित होने के कारण लोगों को दुर्गंध और संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। निजी एजेंसियों के जरिए सफाई व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे पूरी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
कुरुक्षेत्र में बढ़ा तनाव
हड़ताल के बीच कुरुक्षेत्र में पुलिस कार्रवाई के विरोध में कर्मचारियों ने थाने का घेराव भी किया। इससे सरकार और आंदोलनकारी कर्मचारियों के बीच टकराव और बढ़ने के संकेत मिले हैं। आने वाले कुछ दिन इस आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि सरकार ने सख्त रुख अपनाया है, जबकि कर्मचारी भी अपनी मांगों पर कायम हैं।
नियमितीकरण पर अटका पूरा मामला
सरकार का दावा है कि कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं। सबसे बड़ा विवाद नियमितीकरण की मांग को लेकर बना हुआ है। सरकार का कहना है कि नियमित नियुक्ति में कानूनी और तकनीकी बाधाएं हैं। इसके विकल्प के तौर पर कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा और वेतन वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है। दूसरी ओर कर्मचारी संगठन नियमितीकरण की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
किन आरोपों में हुई कार्रवाई?
विभाग के अनुसार, जिन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उन पर कई आरोप लगाए गए हैं। इनमें हड़ताल में शामिल होना, अन्य कर्मचारियों को भी आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित करना, गैरकानूनी यूनियन गतिविधियों में भाग लेना और विभागीय कार्य में बाधा डालना शामिल है। इन आरोपों की आगे की प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार चलेगी।








