Haryana Weather Today: हरियाणा में पिछले कुछ दिनों की बारिश के बाद अब मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। इसका असर पूरे प्रदेश में साफ दिखाई देने लगा है। बारिश कम होने से तापमान फिर बढ़ने लगा है और लोगों को गर्मी के साथ उमस का भी सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 4 से 5 दिनों तक प्रदेश में व्यापक बारिश की संभावना नहीं है। केवल कुछ उत्तरी जिलों में हल्की बारिश हो सकती है, जबकि अधिकांश इलाकों में मौसम शुष्क बना रहेगा।
आज सिर्फ इन 3 जिलों में बारिश की संभावना
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार को पंचकूला, अंबाला और यमुनानगर में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। इसके अलावा रोहतक, हिसार, जींद, सिरसा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, महेंद्रगढ़ और प्रदेश के अधिकांश अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। दिनभर बादलों की आवाजाही जरूर रह सकती है, लेकिन व्यापक बारिश की संभावना कम है।
हिसार सबसे गर्म, कई जिलों में बढ़ा तापमान
मानसून कमजोर पड़ने का असर तापमान पर भी दिखाई दे रहा है। हिसार प्रदेश का सबसे गर्म जिला बन गया है, जहां अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा नूंह, भिवानी और सिरसा में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। बारिश की कमी के कारण दिन में तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है।
अगले 4-5 दिन क्यों रहेगा कमजोर मानसून?
चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अगले चार से पांच दिनों तक मानसूनी गतिविधियां कमजोर बनी रहेंगी।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ट्रफ धीरे-धीरे हिमालय की तलहटी की ओर खिसक रही है। इसके चलते हरियाणा में मानसूनी हवाओं की ताकत कम होगी और बारिश की गतिविधियां सीमित रह सकती हैं।
इस बार अब तक कितनी हुई बारिश?
1 जून से 26 अगस्त तक हरियाणा में 257.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक 299.9 मिमी वर्षा होती है। यानी पूरे मानसून सीजन में अब तक करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि अगस्त महीने की बात करें तो स्थिति कुछ अलग रही। इस महीने अब तक 109.9 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई है, जबकि सामान्य औसत 96.1 मिमी है। यानी अगस्त में औसत से लगभग 14 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।
किन जिलों में सबसे ज्यादा और सबसे कम बारिश?
इस मानसून में कई जिलों में बारिश का वितरण असमान रहा है। करनाल और अंबाला में सामान्य से 51 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इसके अलावा कैथल, सिरसा, पंचकूला, रोहतक और जींद भी कम वर्षा वाले जिलों की सूची में शामिल हैं। दूसरी ओर भिवानी में सामान्य से 117 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, पलवल, चरखी दादरी और रेवाड़ी में भी सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह मौसम?
कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान का असर खेती पर पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां किसानों को फसलों की नमी बनाए रखने के लिए सिंचाई पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं होती है, तो धान, कपास और अन्य खरीफ फसलों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।






