हरियाणा के गांवों की सड़कें अब होंगी बेहतर, सरकार बना रही नई योजना

हरियाणा के गांवों में खराब और अधूरी सड़कों की समस्या लंबे समय से लोगों की बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क का एक हिस्सा एक विभाग के पास है और दूसरा हिस्सा किसी दूसरे विभाग ...

Sunil Beniwal

हरियाणा के गांवों में खराब और अधूरी सड़कों की समस्या लंबे समय से लोगों की बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क का एक हिस्सा एक विभाग के पास है और दूसरा हिस्सा किसी दूसरे विभाग के अधीन आता है। इसी वजह से सड़क निर्माण और मरम्मत का काम अक्सर बीच में अटक जाता है। अब राज्य सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की तैयारी में है। अगर सरकार की नई योजना लागू होती है, तो गांवों की सड़क व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

PWD को सौंपी जा सकती हैं गांवों की सड़कें

लोक निर्माण विभाग हरियाणा को गांवों को जोड़ने वाली पांच करम तक चौड़ी सड़कों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। फिलहाल इनमें से कई सड़कें हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के अधीन आती हैं। सरकार अब इन्हें एक ही विभाग के तहत लाने पर विचार कर रही है, ताकि सड़क निर्माण और रखरखाव का काम व्यवस्थित तरीके से हो सके।

मुख्यमंत्री ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट

नायब सिंह सैनी ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और आसान हो सकती है।

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क्यों फंस जाता है सड़क निर्माण का काम?

प्रदेश के कई गांवों में सड़कें अलग-अलग विभागों में बंटी हुई हैं। कहीं सड़क का आधा हिस्सा पीडब्ल्यूडी के पास है तो बाकी हिस्सा मार्केटिंग बोर्ड के पास। यही वजह है कि कई बार एक विभाग अपना हिस्सा बना देता है, लेकिन दूसरा हिस्सा अधूरा रह जाता है। कई मामलों में दोनों विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण सड़कें लंबे समय तक खराब हालत में पड़ी रहती हैं।

सांसद और विधायक भी उठा चुके हैं मुद्दा

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क समस्याओं को लेकर सांसदों और विधायकों ने भी कई बार सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया था। उनका मानना है कि अगर सभी सड़कें एक ही विभाग के अधीन आ जाएं, तो निर्माण, मरम्मत और रखरखाव का काम ज्यादा तेजी और पारदर्शिता के साथ किया जा सकेगा।

फाइलों का लंबा चक्कर खत्म होने की उम्मीद

सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह माना जा रहा है कि सड़क परियोजनाओं में फाइलों का लंबा चक्कर कम होगा। अगर सड़कें PWD को ट्रांसफर होती हैं, तो मंजूरी प्रक्रिया तेज हो सकती है। साथ ही बजट पास कराने, निगरानी करने और तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल में भी आसानी होगी।

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बजट और स्टाफ में भी होगा बदलाव

सड़कें ट्रांसफर होने के बाद सरकार को बजट, स्टाफ और तकनीकी संसाधनों का पुनर्गठन भी करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया शुरुआती दौर में चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे ग्रामीण सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

गांवों के लोगों को क्या फायदा होगा?

अगर यह योजना लागू होती है, तो गांवों में टूटी और अधूरी सड़कों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। बेहतर सड़कें बनने से किसानों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसपोर्ट और कारोबार को भी मजबूती मिल सकती है।

FAQs

1. सरकार कौन सी सड़कें PWD को सौंपने की तैयारी कर रही है?
पांच करम तक चौड़ी ग्रामीण सड़कें।

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2. फिलहाल ये सड़कें किस विभाग के पास हैं?
हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड के अधीन।

3. यह फैसला क्यों लिया जा रहा है?
सड़क निर्माण और मरम्मत में हो रही देरी और विभागीय उलझनों को खत्म करने के लिए।

4. इस योजना से क्या फायदा होगा?
सड़क निर्माण और रखरखाव का काम तेज और व्यवस्थित हो सकेगा।

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5. क्या इस पर अंतिम फैसला हो चुका है?
नहीं, फिलहाल रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

6. प्रस्ताव को कौन मंजूरी देगा?
हरियाणा कैबिनेट।

7. गांवों के लोगों को इससे क्या फायदा मिलेगा?
बेहतर सड़कें, आसान सफर और ग्रामीण विकास को गति मिलेगी।

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