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Weather Forecast: दिल्ली एनसीआर में मौसम ने एकबार फिर बदली अपनी चाल, अब ठंड के साथ तेज बारिश के लिए तैयार हो जाए जनता

बुधवार को दिल्ली-एनसीआर के मौसम में फिर से परिवर्तन हो सकता है। कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में रविवार सुबह हल्के से मध्यम कोहरा था
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Weather Forecast

बुधवार को दिल्ली-एनसीआर के मौसम में फिर से परिवर्तन हो सकता है। कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में रविवार सुबह हल्के से मध्यम कोहरा था। तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम था।

सोमवार को ऐसा रहेगा मौसम

सफदरजंग का अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था, और न्यूनतम सात डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्य से तीन डिग्री कम था। सोमवार को मौसम विभाग का अनुमान है कि तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। सुबह और शाम ठंड का प्रभाव रहेगा। न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

राजधानी की हवा दस दिन बाद फिर से हुई बदतर

दस दिनों बाद, शहर की हवा एक बार फिर दमघोटू हो गई है। दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक रविवार को 300 के पार पहुंच गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। 31 जनवरी को, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई। प्रदूषित हवा में रहने वाले लोगों को जिससे कुछ दिनों के लिए काफी राहत मिली थी, लेकिन प्रदूषण अब फिर से बढ़ने लगा है। दिल्ली का एक्यूआई रविवार को 313 अंक पर था।

सबसे प्रदूषित जगह और इसका कारण

नवंबर महीने में राजधानी के 13 हॉटस्पॉट क्षेत्रों में एक्यूआई गंभीर और बेहद खराब रहा। यहाँ सड़कें टूटी हुई हैं, निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल, यातायात जाम, आरएमसी संयंत्रों का सही तरीके से काम नहीं करना, आदि कारणों से प्रदूषण का स्तर अधिक रहता है।

तमाम प्रयासों के बावजूद पांच हॉटस्पॉट गंभीर स्थिति में हैं

वहीं, कई प्रयासों के बावजूद राजधानी के प्रदूषण में कमी नहीं आयी है। नवंबर महीने में पांच हॉटस्पॉट पर औसत एक्यूआई 400 से अधिक था। मतलब, लोगों ने पूरे महीने गंभीर हवा में सांस ली।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने प्रदूषण की प्रमुख प्रवृत्तियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट बनाई है। इसमें नवंबर महीने में प्रदूषण की जांच की गई है। लगभग पांच साल पहले, 13 सबसे अधिक प्रदूषित स्थानों (हॉटस्पॉट) का नामांकन किया गया था। हर साल यहां पर कई उपाय किए जाते हैं। प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने के लिए इसमें टीमें तैनात की जाती हैं। निर्माण स्थलों पर धूलरोधी उपाय, मोबाइल एंटी स्मोग गन और खुले में कचरा जलाने से रोका जाता है। इनके बावजूद भी प्रदूषण कम नहीं हुआ है।