Monsoon Ki Barish: समुद्र का तापमान हो रहा है ठंडा इसी बीच बनेगा ला नीना, इस महीने होगी मानसून की तगड़ी बारिश

By Vikash Beniwal

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केरल में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के किसी भी समय दस्तक देने की उम्मीद है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपनी ताज़ा भविष्यवाणी में कहा है कि समुद्र का तापमान ठंडा हो रहा है। इसके कारण जून के महीने में अल नीनो की स्थिति उभरने की संभावना है जो जुलाई में ला नीना में परिवर्तित हो सकती है। इसका मतलब है कि जुलाई से लेकर सितंबर तक देश के कई हिस्सों में जमकर बारिश हो सकती है।

ला नीना का असर

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि मॉनसून की कम दबाव प्रणाली और अवसाद जैसे कई कारक मॉनसून वाली बारिश को प्रभावित करते हैं। इनमें से ला नीना प्रमुख है। ला नीना के कारण सामान्य से अधिक वर्षा की उम्मीद की जा सकती है। इस वर्ष ला नीना की स्थिति के कारण अगस्त और सितंबर के दौरान अधिक वर्षा हो सकती है।

क्षेत्रवार वर्षा की संभावना

आईएमडी के अनुसार जून से सितंबर के बीच दक्षिण प्रायद्वीपीय और मध्य भारत में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है। वहीं, उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य वर्षा होगी। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में औसत से कम वर्षा होने की संभावना है। इससे पहले आईएमडी ने अप्रैल में कहा था कि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत को छोड़कर शेष सभी क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा हो सकती है।

ला नीना और भारतीय मॉनसून

जलवायु विज्ञान की दृष्टि से ला नीना को भारतीय मॉनसून के लिए अनुकूल माना जाता है। पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल ने बताया कि ला नीना आम तौर पर मजबूत मॉनसूनी हवा की संभावना के बारे में बताता है। मजबूत मॉनसून प्रवाह मॉनसून अवसादों के लिए नमी की आपूर्ति कर सकता है जिससे अधिक बारिश हो सकती है।

चक्रवात की संभावना

जिस साल ला नीना का असर देखने को मिलता है उस साल चक्रवात की संभावना सामान्य से अधिक होती है। ला नीना के कारण बंगाल की खाड़ी और अरब सागर सहित उत्तरी हिंद महासागर में समुद्री गर्मी बढ़ जाती है। इससे समुद्री क्षेत्रों में चक्रवात बनने की संभावना बढ़ जाती है जो तटीय इलाकों में भारी बारिश और तूफान ला सकते हैं।

कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों पर असर

मॉनसून की बारिश कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। सामान्य से अधिक वर्षा से किसानों को फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी होगी। वहीं कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा बाढ़ की स्थिति भी पैदा कर सकती है जिससे निपटने के लिए सरकार और प्रशासन को तैयार रहना होगा।

शहरी इलाकों में तैयारियां

शहरी इलाकों में भी मॉनसून की बारिश से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और सड़कों की मरम्मत के कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं ताकि बारिश के दौरान आम जनता को कम से कम असुविधा हो।

जलवायु परिवर्तन का असर

पिछले कुछ वर्षों में जलवायु परिवर्तन का असर भी मॉनसून पर देखा गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण मौसम के पैटर्न में बदलाव हो रहा है जिससे कभी-कभी अत्यधिक वर्षा और कभी-कभी सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।

Vikash Beniwal

मेरा नाम विकास बैनीवाल है और मैं हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला हूँ. मैं पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया पर राइटर के तौर पर काम कर रहा हूं. मुझे लोकल खबरें और ट्रेंडिंग खबरों को लिखने का अच्छा अनुभव है. अपने अनुभव और ज्ञान के चलते मैं सभी बीट पर लेखन कार्य कर सकता हूँ.