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योगी सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों की कर दी मौज, चीनी मिलों ने शुरू की अन्तर मूल्य भुगतान

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Sugarcane farmers of UP

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में इस वर्ष चीनी (Sugar) का उत्पादन 110 लाख टन से अधिक होने की संभावना है। इसका कारण महाराष्ट्र (Maharashtra) और कर्नाटक (Karnataka) में गन्ने (Sugarcane) की फसल में आई कमजोरी है। केंद्र सरकार (Central Government) ने गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल (Ethanol) बनाने पर पाबंदी लगा दी है, जिससे उत्तर प्रदेश में इस बार एथेनॉल कम और चीनी ज्यादा बनने की उम्मीद है।

गन्ने की पेराई और चीनी का उत्पादन

प्रदेश की 120 चीनी मिलों (Sugar Mills) में अब तक 574 लाख टन गन्ने की पेराई कर लगभग 58 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है। चालू पेराई सीजन (Current Crushing Season) में अब तक 14,200 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया जा चुका है, जो कुल बकाया का 82 प्रतिशत है।

गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य और भुगतान

प्रदेश सरकार (State Government) द्वारा गन्ने का राज्य परामर्शी मूल्य (State Advisory Price) 20 रुपये प्रति कुंतल बढ़ाए जाने के बाद चीनी मिलों ने किसानों (Farmers) को अंतर मूल्य की अदायगी भी शुरू कर दी है। हालांकि गन्ने की आपूर्ति में कमी और समय पर मूल्य घोषणा न होने के कारण किसानों ने बड़ी मात्रा में गन्ना खांडसारी इकाईयों (Khandsari Units) को बेच दिया है।

खांडसारी इकाईयों का योगदान

पिछले पेराई सत्र में 59.13 लाख टन गन्ना खांडसारी इकाईयों को गया था, इस बार इस मात्रा में वृद्धि की संभावना है। फिर भी प्रदेश में 104.87 लाख टन चीनी का उत्पादन पिछले सत्र में हुआ था, जिससे इस बार और अधिक उत्पादन की उम्मीद है।

अन्य राज्यों में चीनी उत्पादन की स्थिति

महाराष्ट्र में गन्ने की कमजोर फसल के कारण अब तक 63.23 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। कर्नाटक में भी इसी कारण चीनी उत्पादन कम होने की उम्मीद है। इससे चीनी की घरेलू मांग (Domestic Demand) को उत्तर प्रदेश से पूरा किया जाएगा। केंद्र सरकार ने पूरे सीजन के लिए पहले से तय 17 लाख टन से अधिक एथेनॉल बनाने के लिए चीनी का आवंटन बढ़ाने की संभावना से इंकार किया है।