शादीशुदा होने के बाद भी 35 साल से विधवा की जिंदगी जी रही महिला, बुढ़ापे में लौटा सुहाग और फिर महिला ने

By Vikash Beniwal

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छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव की एक महिला ने पिछले पैंतीस वर्षों से विधवा के रूप में जीवन व्यतीत किया। उनके पति जिन्होंने कमाई के लिए घर से बाहर कदम रखा था कभी लौटकर नहीं आए। वर्षों तक चली तलाश के बावजूद जब कोई सुराग नहीं मिला तो महिला ने अपने आप को मानसिक रूप से विधवा मान लिया और अपनी मांग का सिंदूर मिटा दिया।

पति का लापता होना और परिणाम

झाम सिंह, जो 65 वर्ष के हैं, पैंतीस साल पहले बेंगलुरु गए थे और फिर कभी घर नहीं लौटे। जब उनका कोई पता नहीं चल पाया, तो उनकी पत्नी ने उन्हें मृत समझ लिया और अपनी मांग से सिंदूर मिटा दिया। यह जानकर कि झाम सिंह मानसिक रोगी थे यह समझ में आता है कि क्यों उन्होंने अपना परिवार और घर भूल दिया और इतने वर्षों तक उन्हें लापता माना गया।

अस्पताल में इलाज और पहचान की वापसी

झाम सिंह का इलाज बेंगलुरु के एक मानसिक अस्पताल में हो रहा था जहाँ उन्होंने कई साल बिताए। इलाज के बाद उन्होंने अपने गांव का नाम याद किया जिसके बाद संस्था ने जुन्नारदेव में संपर्क किया और उनकी पत्नी को इस बात की सूचना दी कि उनका पति अभी भी जिंदा है।

खुशी की वापसी और नया जीवन

अपने पति को वर्षों बाद जिंदा देखकर महिला की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। यह खबर उनके लिए एक नई उम्मीद लेकर आई और उन्होंने फिर से अपनी मांग में सिंदूर भरा। यह घटना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए भी खुशी का क्षण थी क्योंकि यह दिखाती है कि आशा कभी नहीं छोड़नी चाहिए।

Vikash Beniwal

मेरा नाम विकास बैनीवाल है और मैं हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला हूँ. मैं पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया पर राइटर के तौर पर काम कर रहा हूं. मुझे लोकल खबरें और ट्रेंडिंग खबरों को लिखने का अच्छा अनुभव है. अपने अनुभव और ज्ञान के चलते मैं सभी बीट पर लेखन कार्य कर सकता हूँ.