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भारत में शराब पीने को पैग में क्यों मापा जाता है, जाने इसके पीछे की मजेदार कहानी

शराब कल्चर में 'पैग' शब्द बहुत मायने रखता है, जिसकी जड़ें यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) के खदान श्रमिकों की गहरी और दुर्लभ कहानियों में छिपी हुई हैं।
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भारत में शराब पीने को पैग में क्यों मापा जाता है

शराब कल्चर में 'पैग' शब्द बहुत मायने रखता है, जिसकी जड़ें यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) के खदान श्रमिकों की गहरी और दुर्लभ कहानियों में छिपी हुई हैं। पैग को 'कीमती शाम का गिलास' के रूप में खूब पसंद किया जाता है है। आइए इस ऐतिहासिक ड्रिंकिंग कल्चर की गहराई में उतरते हैं।

कैसे हुआ पैग शब्द का जन्म

यूनाइटेड किंगडम में खदान श्रमिकों (Mine Workers) की मुश्किल लाइफस्टाइल और उनकी दिनचर्या एक अनूठी परंपरा को जन्म देती है। ठंडी और कठिन परिस्थितियों में काम करने के बाद श्रमिकों को ब्रांडी (Brandy) की एक छोटी बोतल प्रदान की जाती थी, जिसे वे 'कीमती शाम का गिलास' कहते थे। इसी से 'पैग' शब्द का जन्म हुआ।

ब्रिटिश राज और पैग की माप

ब्रिटिश राज (British Rule) के दौरान पैग की माप दो इकाइयों में सीमित थी: एक छोटे पैग के लिए 30 मिलीलीटर और एक बड़े पैग के लिए 60 मिलीलीटर। इस परंपरा ने भारतीय ड्रिंकिंग कल्चर(Indian Drinking Culture) में भी अपनी जगह बना ली, जहां यह आज भी प्रचलित है।

पटियाला पैग है एक राजसी विरासत

पटियाला पैग (Patiala Peg) की कहानी पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह के दरबार से शुरू होती है। यह विशेष पैग जो 120 मिलीलीटर व्हिस्की (Whiskey) से बना होता है, न केवल उत्तर भारत के व्हिस्की प्रेमियों के लिए एक पसंदीदा है बल्कि यह एक राजसी परंपरा का प्रतीक भी है।

पैग न केवल एक ड्रिंक मात्र है बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीक (Social and Cultural Symbol) भी है. जो दोस्ती, साथ और उत्सव के मोमेंट्स को और अधिक खास बनाता है। चाहे बॉलीवुड के गाने हों या पारंपरिक समारोह, पैग हमेशा खुशी और सामंजस्य का प्रतीक रहा है।