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सर्दी या बारिश में भी रेल पटरीयों पर जंग क्यों नही लगता? होशियार लोगों को भी नही पता वजह

भारतीय रेलवे (Indian Railway) देश की आवागमन की धमनियों की तरह अपनी विशाल पटरियों के नेटवर्क के साथ लाखों यात्रियों और टनों सामग्री को उनके गंतव्य तक पहुँचाता है।
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भारतीय रेलवे (Indian Railway) देश की आवागमन की धमनियों की तरह अपनी विशाल पटरियों के नेटवर्क के साथ लाखों यात्रियों और टनों सामग्री को उनके गंतव्य तक पहुँचाता है। ये रेल पटरियाँ (Railway Tracks) न केवल भारी वजन को सहन करती हैं बल्कि विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का सामना भी करती हैं। आइए जानते हैं कि इन पटरियों पर जंग (Rust) क्यों नहीं लगती और इसके पीछे क्या विज्ञान है।

लोहे में जंग का कारण

जंग लगना एक रासायनिक प्रक्रिया है जो लोहे के ऑक्सीजन और नमी के संपर्क में आने पर होती है। इस प्रक्रिया में लोहे की सतह पर आयरन ऑक्साइड (Iron Oxide) की एक परत बन जाती है, जिसे हम जंग के रूप में जानते हैं। यह परत लोहे को कमजोर बना देती है और उसकी आयु को घटाती है।

रेलवे ट्रैक और जंग-रोधी तकनीक

रेलवे ट्रैक्स को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है ताकि वे जंग के प्रतिरोधी हों। इन पटरियों का निर्माण मैंगनीज स्टील (Manganese Steel) से किया जाता है, जिसमें मैंगनीज और कम मात्रा में कार्बन होता है। मैंगनीज स्टील की यह विशेषता है कि यह ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया बहुत ही धीमी हो जाती है या नहीं होती।

रेलवे ट्रैक की दीर्घायु और लागत प्रभावितता

रेलवे ट्रैक्स पर जंग न लगने का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि इससे ट्रैक्स की दीर्घायु बढ़ती है और लागत में कमी आती है। अगर ट्रैक्स पर जंग लग जाए तो उन्हें बार-बार बदलना पड़ेगा, जो कि एक महंगा सौदा है। इसके अलावा जंग लगने से रेलवे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है।