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भारी बारिश या तेज स्पीड के बावजूद ट्रेन फिसलती क्यों नही, असली वजह भी है बेहद मजेदार

ट्रेनें जब पटरियों पर दौड़ती हैं तो उसके पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य होता है। यह रहस्य है भौतिकी के सिद्धांतों का उपयोग, जो ट्रेनों को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलने में मदद करता है।
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ट्रेनें जब पटरियों पर दौड़ती हैं तो उसके पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य होता है। यह रहस्य है भौतिकी के सिद्धांतों का उपयोग, जो ट्रेनों को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चलने में मदद करता है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिक तकनीक (Scientific Technique) और घर्षण का नियम (Friction Law) किस तरह से ट्रेनों की इस दौड़ में अहम भूमिका निभाते हैं।

घर्षण का कमाल

ट्रेनें जब पटरियों पर दौड़ती हैं तो घर्षण (Friction) उन्हें फिसलने से बचाता है। यह घर्षण बल ट्रेन और पटरियों के बीच एक आवश्यक ऐक्शन रिएक्शन पैदा करता है, जिससे ट्रेनें सुरक्षित रूप से और नियंत्रित गति (Controlled Speed) पर चलती हैं।

पार्श्वकारी बल है सुरक्षा की गारंटी

ट्रेन के दोनों किनारों पर लगने वाला पार्श्वकारी बल (Lateral Force) इसे पटरी पर स्थिर रखता है। यह बल तब तक सुरक्षित है, जब तक कि यह लंबवत बल (Vertical Force) के 30 या 40 प्रतिशत से अधिक नहीं होता। इस संतुलन को बनाए रखकर ट्रेनों को पटरी से उतरने या दुर्घटनाग्रस्त (Derailment) होने के खतरे से बचाया जाता है।

वैज्ञानिक उपायों का प्रयोग

ट्रेनों की अधिकतम स्पीड क्षमता (Maximum Speed Capacity) से कम पर चलाकर और वैज्ञानिक उपायों (Scientific Measures) का प्रयोग करके उन्हें दुर्घटनाओं से बचाया जाता है। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि ट्रेन सेवाओं की विश्वसनीयता (Reliability) में भी बढ़ोतरी होती है।

सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन

ट्रेनों को पटरी से फिसलने और दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना से बचाने के लिए कई सुरक्षा मानक (Safety Standards) निर्धारित किए गए हैं। इन मानकों का पालन न केवल पटरियां बिछाने के दौरान किया जाता है, बल्कि ट्रेन चालकों (Train Drivers) को भी इससे संबंधित जरूरी निर्देश दिए जाते हैं।

नियमित जांच और रखरखाव

रेलवे द्वारा समय-समय पर पटरियों की जांच और देखभाल (Maintenance) की जाती है, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी को समय रहते ठीक किया जा सके। यह प्रक्रिया ट्रेन सेवाओं के सुचारू संचालन और यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करती है।

विज्ञान और तकनीक की जीत

यद्यपि कभी-कभार ट्रेन पटरी से उतरने की घटनाएँ सामने आती हैं, लेकिन इसके पीछे आमतौर पर तकनीकी खराबी या मानवीय त्रुटि (Human Error) होती है। बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से ट्रेन के फिसलने की घटनाएं दुर्लभ होती हैं, क्योंकि इसके पीछे वैज्ञानिकों की मेहनत और एडवांस साइंस (Advanced Science) एकसाथ काम करता है।