साधु संत हमेशा भगवा रंग के वस्त्र ही क्यों पहनते है, जाने कौनसे संत पहनते है काले और सफेद रंग के वस्त्र

By Vikash Beniwal

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हिन्दू धर्म में साधु-संन्यासियों का विशेष महत्व है जिन्हें सदियों से सम्मान और आदर की नजरों से देखा जाता है। इनका जीवन त्याग और आत्म-साक्षात्कार की एक लंबी यात्रा होती है। उनके वेशभूषा के रंग भी उनके जीवन के उद्देश्य और आध्यात्मिक मार्ग को प्रतिबिंबित करते हैं। आइए इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि साधुओं के भगवा, सफेद, और काले रंग के वस्त्रों के पीछे का राज के बारे में जानेगें..

भगवा

शैव और शाक्य साधुओं का भगवा रंग बेहद प्रमुख है और इसे अक्सर ऊर्जा, त्याग और ब्रह्मचर्य का प्रतीक माना जाता है। भगवा रंग सनातन धर्म की पहचान के समान है और यह दिखाता है कि साधु ने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर दिया है और वे केवल अध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हैं। इस रंग को धारण करने वाले साधु अपने मन को नियंत्रित रखते हैं और अध्यात्मिक शांति की ओर अग्रसर रहते हैं।

सफेद

जैन धर्म के अनुयायी, विशेषकर श्वेतांबर साधु, सफेद रंग के वस्त्र पहनते हैं। सफेद रंग शुद्धता और सादगी को दर्शाता है। यह रंग इस बात का प्रतीक है कि साधु ने किसी भी प्रकार की वासना और विलासिता का परित्याग कर दिया है और केवल आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर चल रहा है। श्वेतांबर साधु इस रंग को धारण करके जीवन की अंतरतम यात्रा को व्यक्त करते हैं।

काला

तांत्रिक साधु जो कि तंत्र-मंत्र विद्या में पारंगत होते हैं काले रंग के वस्त्र पहनते हैं। काला रंग रहस्य और गहन आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक होता है। यह रंग उन साधुओं की गहराई और उनके ज्ञान की गहराई को दर्शाता है। काले रंग का वस्त्र धारण करने वाले साधु अक्सर रुद्राक्ष की माला भी पहनते हैं जो कि उनके तांत्रिक साधना का हिस्सा होती है।

Vikash Beniwal

मेरा नाम विकास बैनीवाल है और मैं हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला हूँ. मैं पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया पर राइटर के तौर पर काम कर रहा हूं. मुझे लोकल खबरें और ट्रेंडिंग खबरों को लिखने का अच्छा अनुभव है. अपने अनुभव और ज्ञान के चलते मैं सभी बीट पर लेखन कार्य कर सकता हूँ.