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रात में ही आखिर क्यों होता है किन्नरों का अंतिम संस्कार, क्यों नहीं हो सकते बाहरी लोग शामिल

अपने ट्रेनों में या बस स्टैंड पर इसके अतिरिक्त ट्रैफिक सिग्नल पर भी किन्नरो को पैसे मांगते हुए देखा होगा. घरों में भी किसी खुशी के माहौल में, शादी में या फिर किसी फंक्शन में किन्नर लोग आते हैं। 
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kinnar society

अपने ट्रेनों में या बस स्टैंड पर इसके अतिरिक्त ट्रैफिक सिग्नल पर भी किन्नरो को पैसे मांगते हुए देखा होगा. घरों में भी किसी खुशी के माहौल में, शादी में या फिर किसी फंक्शन में किन्नर लोग आते हैं, दुआएं देते हैं और पैसे लेकर चले जाते हैं. परंतु क्या आप जानते हैं कि किन्नर समाज के अपने कुछ अलग नियम है. किन्नर समाज में मृतक की शव यात्रा भी आधी रात को निकल जाती है. आज हम बताएंगे आखिर क्या है इसके पीछे का कारण.

किन्नर को हो जाता है मृत्यु का अहसास 

किन्नर समाज में ऐसा माना जाता है कि किन्नर को अपनी मृत्यु का आभास बहुत पहले से हो जाता है. इसलिए वह काफी समय पहले से ही कहीं जाना छोड़ देते हैं और खाना पीना भी त्याग देते हैं. केवल पानी पीते हैं. इस दौरान वह अपने और

अपने किन्नर साथियों के लिए ईश्वर से दुआ करते हैं. कई लोग मारणासन किन्नर की दुआएं लेने आते हैं क्योंकि यह बहुत अधिक असरदार मानी जाती है. किन्नर इस समय दुआ करते हैं कि अगले जन्म में उन्हें सामान्य इंसान का जन्म मिले.

नहीं दी जाती किन्नर की मौत की जानकारी

यदि किसी किन्नर की मौत हो जाती है तो इसकी मृत्यु की खबर को गुप्त रखा जाता है. बाहरी लोगों को किन्नर की मृत्यु की खबर नहीं बताई जाती. साथ ही किन्नर जिस स्थान पर अंतिम संस्कार करते है उस स्थान को भी गोपनीय रखा जाता.

कैसे निकलती है शव यात्रा

सामान्य लोग मृतक को चार कंधों पर उठाकर दफनाने लेकर जाते हैं परंतु किन्नर समाज में ऐसा बिल्कुल नहीं है. किन्नर समाज में किन्नर की मृत्यु के बाद उनके मृतक शरीर को खड़े करके दफनाने वाले स्थान तक लेकर जाया जाता है.

ऐसा माना जाता है कि यदि कोई आम इंसान किन्नर के पृथक शरीर को देख ले तो अगले जन्म में उसे फिर से किन्नर का रूप ही लेना पड़ेगा. यही कारण है कि किन्नर की शव यात्रा आधी रात में निकाली जाती है. शव यात्रा निकालने से पहले उसे चप्पल और जूते से पीटा जाता है.

इसके पीछे की मान्यता यह है कि यदि किन्नर ने इस जन्म में कोई पाप किये हैं तो वह भी साफ हो जाए और अगले जन्म में उसे फिर से किन्नर का रूप ना मिले. बाकी किन्नर दुआएं करते हैं कि अगले जन्म में उन्हें सामान्य मनुष्य का जन्म मिले.

एक सप्ताह का रखा जाता है व्रत

यदि किसी किन्नर की मृत्यु हो जाती है तो पूरे किन्नर समाज द्वारा एक सप्ताह का व्रत रखा जाता है. इस अवधि में किन्नर कुछ खाते नहीं है बल्कि अपनी मृतक साथी के लिए दुआएं करते हैं कि उसे अगले जन्म में किन्नर का रूप ना मिले.