ट्रैफिक सिग्नल में लाल, हरी और पीली रंग की बत्तियां ही क्यों इस्तेमाल होती है, होशियार लोग भी नही जानते इसके पीछे का कारण

By Vikash Beniwal

Published on:

ट्रैफिक सिग्नल जिसे आप आये दिन चौराहों पर देखते हैं का इतिहास 1868 के लंदन से शुरू होता है। उस समय घोड़ा गाड़ी और बग्गी साधारण यातायात के साधन थे और बढ़ती जनसंख्या के कारण भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात की समस्या उत्पन्न होने लगी थी। इसी को देखते हुए ट्रैफिक सिग्नल का आविष्कार किया गया था जिससे यातायात को नियंत्रित किया जा सके और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

दुनिया की पहली ट्रैफिक लाइट

10 दिसंबर, 1868 को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर पर दुनिया की पहली ट्रैफिक लाइट लगाई गई। यह ट्रैफिक लाइट गैस से चलने वाली थी और इसमें केवल लाल और हरी रोशनी शामिल थी। हालांकि गैस के कारण होने वाले धमाकों की वजह से यह प्रणाली अधिक समय तक प्रयोग में नहीं लाई जा सकी।

रंगों का चयन

आज के ट्रैफिक सिग्नल में तीन रंग होते हैं: लाल, पीला (या हल्का पीला) और हरा। ये रंग समुद्री जहाजों के नेविगेशन सिस्टम से प्रेरित हैं। समुद्र में, इन रंगों का उपयोग जहाजों की दिशा और स्थिति को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। लाल रंग रुकने का संकेत देता है हरा चलने का और पीला रंग सतर्कता बरतने और तैयार रहने का संकेत देता है।

ट्रैफिक सिग्नल की चाल चलन

ये रंग न केवल दिन में बल्कि रात के समय भी स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं जो कि उन्हें यातायात संकेतों के लिए उत्तम बनाता है। इस प्रकार के रंग चयन से न केवल यातायात का सुचारू संचालन सुनिश्चित होता है बल्कि यह यातायात दुर्घटनाओं को कम करने में भी मदद करता है।

Vikash Beniwal

मेरा नाम विकास बैनीवाल है और मैं हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला हूँ. मैं पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया पर राइटर के तौर पर काम कर रहा हूं. मुझे लोकल खबरें और ट्रेंडिंग खबरों को लिखने का अच्छा अनुभव है. अपने अनुभव और ज्ञान के चलते मैं सभी बीट पर लेखन कार्य कर सकता हूँ.