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देहरादून के इस हाइवे पर सफर करते वक्त दिखेगा चिड़ियाघर जैसा नजारा, पूल के ऊपर से गुजरेगी गाड़ियाँ तो नीचे घूमते दिखेंगे जंगली जानवर

भारत में विकास की गति को तेज करते हुए एक से बढ़कर एक एक्सप्रेसवे (Expressway) निर्माणाधीन हैं।
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delhi dehradun expressway

भारत में विकास की गति को तेज करते हुए एक से बढ़कर एक एक्सप्रेसवे (Expressway) निर्माणाधीन हैं। इसी क्रम में देश को एक ऐसा अनोखा एक्सप्रेसवे मिलने जा रहा है जो घने जंगलों (Dense Forests) के मध्य से होकर गुजरेगा। इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर (Wildlife Corridor) का निर्माण किया जा रहा है।

वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बनाया जा रहा यह 12 किलोमीटर लंबा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर, जंगल के बीच से होकर गुजरेगा। इस दौरान यात्रियों को जंगली जीवन (Wildlife) का अवलोकन करने का सुनहरा मौका मिलेगा। इस कॉरिडोर की डिजाइन (Design) नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने मिलकर तैयार की है।

राजाजी नेशनल पार्क से है एक्सप्रेसवे का मार्ग

इस वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का निर्माण उत्तराखंड (Uttarakhand) में किया जा रहा है, जो राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) के समीप से गुजरेगा। इस कॉरिडोर के निर्माण से जानवरों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित होगी, साथ ही यह एशिया का सबसे बड़ा वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर (Largest Wildlife Corridor) होगा।

लेटेस्ट तकनीक का उपयोग

इस विशेष कॉरिडोर के निर्माण में सिंगल पिलर (Single Pillar) पर 6 लेन के मार्ग का इस्तेमाल हो रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य जंगल में कंक्रीट के इस्तेमाल को न्यूनतम रखना है। इसके निर्माण में कुल 571 पिलर बनाए जा रहे हैं, प्रत्येक पिलर के बीच 21 मीटर की दूरी होगी।

विकास और संरक्षण की दिशा में एक कदम

6 लेन के इस कॉरिडोर के माध्यम से रोजाना 20,000 से 30,000 वाहनों के गुजरने का अनुमान है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से दिल्ली (Delhi) से देहरादून (Dehradun) तक का सफर मात्र ढाई घंटे में पूरा होगा, जो कि वर्तमान समय में अधिक है। NHAI का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 13,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

आर्थिक विकास और पर्यटन को बढ़ावा

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का निर्माण न केवल दिल्ली और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के निवासियों के लिए मसूरी, देहरादून और हरिद्वार (Mussoorie, Dehradun, Haridwar) जाने का मार्ग सुगम बनाएगा, बल्कि इससे संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक विकास और पर्यटन (Tourism) को भी बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट का निर्माण विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक अनोखा उदाहरण है।