home page

विदेश में पैदा होने पर बच्चे को किस देश की मिलेगी नागरिकता, जाने क्या कहता है देश का कानून

आज के टाइम में जब विश्व एक वैश्विक गांव की तरह बनता जा रहा है. भारतीय उद्योगपति, क्रिकेटर और सेलिब्रिटी जैसे विराट कोहली (Virat Kohli) और अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) अपने पर्सनल और पेशेवर कारणों से
 | 
child-get-citizenship-if-born-abroad-know-what

आज के टाइम में जब विश्व एक वैश्विक गांव की तरह बनता जा रहा है. भारतीय उद्योगपति, क्रिकेटर और सेलिब्रिटी जैसे विराट कोहली (Virat Kohli) और अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) अपने पर्सनल और पेशेवर कारणों से विदेश जाना पसंद करते हैं। इसमें चिकित्सा उपचार, बेबी प्लानिंग से लेकर विभिन्न अन्य कारण शामिल हैं। ऐसे में विदेश में जन्मे बच्चों की नागरिकता का मुद्दा एक महत्वपूर्ण प्रश्न बन कर उभरता है।

बच्चे की नागरिकता पर कानूनी प्रावधान

दुनिया भर के देशों में बच्चों की नागरिकता (Citizenship) को तय करने के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के नियम होते हैं - 'राइट ऑफ सॉइल' (Right of Soil) और 'राइट ऑफ ब्लड' (Right of Blood)। 'राइट ऑफ सॉइल' के अंतर्गत, बच्चे का जन्म जिस देश में हुआ है, उसे उसी देश का नागरिक माना जाता है, जबकि 'राइट ऑफ ब्लड' के तहत बच्चे के माता-पिता की नागरिकता के आधार पर बच्चे की नागरिकता निर्धारित होती है।

विराट-अनुष्का के बेटे और ब्रिटिश नागरिकता की स्थिति

विराट और अनुष्का दोनों भारतीय नागरिक होने के कारण, उनके बेटे अकाय की ब्रिटेन में जन्मे होने के बावजूद नागरिकता की स्थिति जटिल हो जाती है। ब्रिटेन जैसे देशों में जहां 'राइट ऑफ ब्लड' को महत्व दिया जाता है, बच्चे के माता-पिता की नागरिकता के आधार पर ही बच्चे की नागरिकता निर्धारित होती है। इस प्रकार विराट और अनुष्का के बेटे को ब्रिटेन की नागरिकता आसानी से नहीं मिल पाएगी।

ब्रिटेन और अन्य देशों में नागरिकता के नियम

ब्रिटेन में नागरिकता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को निश्चित अवधि तक वैध वीजा पर देश में निवास करने की आवश्यकता होती है, साथ ही अंग्रेजी भाषा और ब्रिटेन के जीवन से जुड़े सामान्य ज्ञान की परीक्षा पास करनी होती है। इसी प्रकार अमेरिका जैसे देश जो 'राइट ऑफ सॉइल' का पालन करते हैं, वहां जन्मे बच्चों को अपने आप ही देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।

भारत में नागरिकता के नियम

भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार 1950 के बाद और 1987 से पहले भारत में जन्मे व्यक्ति को भारतीय नागरिक माना जाता है। 1987 से 2004 के बीच जन्मे व्यक्तियों के लिए कम से कम एक माता-पिता की भारतीय नागरिकता अनिवार्य होती है, जबकि 2004 के बाद जन्मे बच्चों के लिए माता-पिता दोनों की भारतीय नागरिकता या कम से कम एक भारतीय नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी नहीं होना जरूरी है।