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पैतृक गांव पहुंचे गूंगा पहलवान तो खेतों में जाकर उठाई दरांती, घरवालों के साथ सरसों कटाई में की मदद और साथ में बैठकर खाया खाना

वीरेंद्र सिंह उर्फ गूंगा पहलवान एक नाम जो न केवल पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है बल्कि अपनी पैतृक मिट्टी से भी गहरा लगाव रखता है।
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gunga pehalwan bhim awardee

वीरेंद्र सिंह उर्फ गूंगा पहलवान एक नाम जो न केवल पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है बल्कि अपनी पैतृक मिट्टी से भी गहरा लगाव रखता है। भीम और अर्जुन अवार्डी वीरेंद्र सिंह ने पैरा ओलंपिक में भारत के लिए तीन स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

पैतृक गांव की यात्रा और सरसों की कटाई

हाल ही में वीरेंद्र अपने पैतृक गांव सासरौली पहुंचे, जहाँ उन्होंने न केवल सरसों की कटाई में हाथ बंटाया बल्कि आसपास के किसानों से इशारों में बातचीत कर उनका हाल-चाल भी जाना। खेतों में अपने परिजनों के साथ दोपहर का भोजन करते हुए वीरेंद्र की प्रसन्नता साफ दिखाई दी।

मिट्टी से जुड़ाव और खेती में रुचि

वीरेंद्र सिंह जब भी अपने पैतृक गांव आते हैं, अपने खेतों में काम करना नहीं भूलते। वे खुद को खेती-किसानी से जोड़े रखने में विश्वास रखते हैं और समय मिलते ही खेतों में जाकर अपने खेतों की देखभाल करते हैं। फसल की कटाई के समय वे परिजनों के साथ मिलकर फसल कटाई में सहयोग करते हैं, जो उनके मिट्टी से जुड़ाव को दर्शाता है।

ग्रामीणों के बीच लोकप्रियता

ग्रामीणों के अनुसार वीरेंद्र सिंह भले ही एक सेलिब्रिटी बन गए हैं, लेकिन आज भी वे अपनी मिट्टी से जुड़े हुए हैं। अपने गांव आकर वे लोगों के साथ खुशियाँ मनाना नहीं भूलते। उनका यह गुण उन्हें न केवल एक महान खिलाड़ी बल्कि एक जमीन से जुड़े इंसान के रूप में भी पेश करता है। ग्रामीणों में उनकी इस सादगी और विनम्रता की भावना को लेकर गहरी प्रशंसा है।