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ब्रेड में किन कारणों के चलते बनाए जाते है छेद, जाने इसके पीछे की मजेदार वजह

भारत में प्रतिदिन लाखों ब्रेड के पैकेट की खपत (Consumption) होती है। सुबह के नाश्ते (Breakfast) में ब्रेड का उपयोग अत्यधिक प्रचलित है,
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भारत में प्रतिदिन लाखों ब्रेड के पैकेट की खपत (Consumption) होती है। सुबह के नाश्ते (Breakfast) में ब्रेड का उपयोग अत्यधिक प्रचलित है, जिसे लोग विभिन्न तरीकों से जैसे कि जैम, बटर के साथ या फिर ऑमलेट के साथ पसंद करते हैं। लेकिन कभी आपने सोचा है कि ब्रेड के बीच में छेद (Holes) कैसे और क्यों बनते हैं? आइए इसके पीछे की विज्ञानिक प्रक्रिया को समझते हैं।

ब्रेड में छेद बनाने की वजह

ब्रेड बनाने की प्रक्रिया में फर्मेंटेशन (Fermentation) का मुख्य रोल होता है। जब ब्रेड के आटे को गूंथा जाता है और फर्मेंट होने के लिए छोड़ा जाता है, तब आटे में मौजूद खमीर (Yeast) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस उत्पन्न करता है। यही कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले ब्रेड में छेदों का कारण बनते हैं।

दबाव का प्रभाव

आटा गूंथते समय लगाए गए दबाव (Pressure) के अनुसार ब्रेड में छेदों का आकार प्रभावित होता है। ज्यादा दबाव लगाने पर छोटे बुलबुले और कम दबाव पर बड़े बुलबुले बनते हैं। यह विविधता ब्रेड के टेक्सचर (Texture) को प्रभावित करती है।

बेकिंग प्रक्रिया और छेदों का निर्माण

जब फर्मेंटेड आटे को ओवन में सेंका जाता है तो गर्मी के प्रभाव से CO2 गैस फैलती है और ब्रेड के अंदर छेदों को और बड़ा कर देती है। बेकिंग (Baking) के बाद जब ब्रेड को स्लाइस में काटा जाता है, तो इन छेदों की संरचना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

ब्रेड के छेदों का महत्व

ब्रेड में छेदों का होना सिर्फ एक शेप बनाने के लिए ही नहीं है, बल्कि यह ब्रेड के स्वाद (Flavor) और टेक्सचर को भी प्रभावित करता है। छेदों की उपस्थिति ब्रेड को हल्का और स्पंजी बनाती है, जिससे यह ज्यादा स्वादिष्ट और आकर्षक बनता है।