Hansi Butana Link Canal: हरियाणा की एक बड़ी और लंबे समय से बेकार पड़ी परियोजना को अब फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है. करीब 13 वर्षों से बिना उपयोग के पड़ी हांसी-बुटाना लिंक नहर को अब स्टार्ट करने का निर्णय लिया गया है.
सिंचाई विभाग ने इस नहर में पानी स्टोर करने का एक नया प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे हरियाणा के मुख्यमंत्री ने मंजूरी दे दी है. इस परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया गया है.
घग्घर नदी के पानी से भरेगी नहर
यह नहर पंजाब बॉर्डर के अजीमगढ़ से लेकर अंटा गांव तक फैली हुई है, जिसकी लंबाई लगभग 109 किलोमीटर है. इसमें अब घग्घर नदी का पानी लिफ्ट करके डाला जाएगा.
ज्यादातर इस नहर में बरसात का सरप्लस पानी डाला जाएगा ताकि बाढ़ के समय बेकार बह जाने वाले पानी का उपयोग किया जा सके. इससे भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी और साथ ही बाढ़ नियंत्रण में भी अहम योगदान मिलेगा.
कैथल, असंध और जींद के किसानों को होगा सीधा लाभ
- इस प्रोजेक्ट का फायदा विशेष रूप से कैथल, असंध और जींद जिले के किसानों को होगा.
- जब घग्घर में पानी अधिक होगा, तो उसे हांसी ब्रांच और बुटाना ब्रांच में भी डाला जा सकेगा, जिससे खेतों की सिंचाई में सहायता मिलेगी और किसानों की पानी पर निर्भरता भूजल पर कम होगी.
इससे कृषि लागत घटेगी और उपज की गुणवत्ता बेहतर हो सकेगी.
2007-08 में बनी थी नहर
- हांसी-बुटाना लिंक चैनल का निर्माण साल 2007-08 में करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया था.
- तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पहल पर इसे बनाया गया था ताकि भाखड़ा मैन लाइन से दक्षिण हरियाणा तक पानी पहुंचाया जा सके.
- इस नहर में हरियाणा के हिस्से का पानी डाले जाने की योजना थी, लेकिन इसके निर्माण के समय पंजाब सरकार ने इसका विरोध किया और बाद में पंजाब व राजस्थान इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए.
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित
- नहर के बन जाने के बाद भाखड़ा नहर से अजीमगढ़ प्वाइंट पर पंचिंग कर पानी छोड़ा जाना था, लेकिन विवाद सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया.
- अब तक यह मामला विचाराधीन है, जिसके चलते पिछले 13 सालों से नहर बेकार पड़ी है और उसमें कभी भी पानी नहीं डाला गया.
अस्थायी समाधान
- जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आता और भाखड़ा का पानी नहीं मिल पाता, तब तक सरकार ने एक वैकल्पिक समाधान निकाला है.
- अब नहर को बेकार न रहने देने के लिए इसमें घग्घर और अन्य चैनलों का सरप्लस पानी डाला जाएगा. इससे नहर का संरक्षण और प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा.
हर साल बाढ़ से होती है तबाही
- हर साल पंचकूला और आसपास के क्षेत्रों में अधिक बारिश होने पर घग्घर में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.
- 21 फीट से ज्यादा पानी आने पर गुहला-चीका क्षेत्र में भारी तबाही होती है.
- अब इस पानी को नियंत्रित करने के लिए लिफ्ट सिस्टम के माध्यम से घग्घर का पानी हांसी-बुटाना नहर में डाला जाएगा, जिससे बाढ़ से होने वाली तबाही पर अंकुश लगाया जा सकेगा.
भूजल स्तर बढ़ाने में मददगार होगी यह योजना
हरियाणा लंबे समय से भूजल स्तर में गिरावट की समस्या से जूझ रहा है.
- इस परियोजना से जहां फ्लड वाटर का उपयोग हो सकेगा, वहीं नहर के माध्यम से पानी रिसकर जमीन में जाएगा, जिससे जलस्तर में सुधार होगा.
- वाटर रिचार्जिंग का यह मॉडल राज्य में जल संकट को दूर करने में उपयोगी साबित हो सकता है.
सरकार के इस फैसले से खुलेगा वर्षों पुरानी योजना का रास्ता
- 15 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को सरकार ने प्राथमिकता पर लिया है. इससे हांसी-बुटाना नहर को सक्रिय उपयोग में लाया जा सकेगा, और लंबे समय से प्रतीक्षित योजना को जमीन पर उतारा जा सकेगा.
- भले ही भाखड़ा नहर का पानी फिलहाल न मिले, लेकिन इससे किसानों और क्षेत्रवासियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.














