Ayushman Bharat Scheme: हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज को लेकर संकट गहराता जा रहा है. राज्य के 675 पैनलबद्ध निजी अस्पतालों ने आज 7 अगस्त की रात 12 बजे से इलाज बंद करने का ऐलान कर रखा है. इसकी वजह है – सरकार द्वारा बकाया भुगतान में देरी और पोर्टल की खराब प्रणाली. अब पूरा मामला सरकार और अस्पतालों के बीच अहम बैठकों के दौर में पहुंच चुका है.
दो महत्वपूर्ण बैठकें आज
हरियाणा सरकार की तरफ से स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) के साथ आज दोपहर एक निर्णायक बैठक होनी है. इस बैठक में सरकार की कोशिश रहेगी कि इलाज रोकने का फैसला टाल दिया जाए.
इसके बाद शाम को एक और बैठक निजी अस्पतालों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ रखी गई है. इसमें आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार जारी रखने या नहीं रखने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
IMA का साफ रुख
IMA के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन ने दो टूक कहा है कि जब तक सरकार पूरा बकाया अदा नहीं करती और सिस्टम की खामियों को दूर नहीं करती, तब तक इलाज बंद करने का फैसला वापस नहीं लिया जाएगा.
IMA का कहना है कि यह फैसला 675 अस्पतालों पर लागू होगा और इसकी वजह से लाखों मरीजों को परेशानी हो सकती है.
सरकार का दावा
इस बीच हरियाणा की राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) ने दावा किया है कि उन्हें सरकार से बजट मिल चुका है और “पहले आओ, पहले पाओ” के आधार पर बकाया भुगतान शुरू कर दिया गया है.
310 करोड़ रुपये सरकार की ओर से जारी कर दिए गए हैं. हालांकि, IMA का कहना है कि यह पूरा नहीं, आंशिक भुगतान है और इसमें भी देरी होगी.
IMA का जवाब
IMA के अनुसार, सरकार ने 15 जुलाई तक का बकाया भुगतान करने का वादा किया था, जो लगभग 500 करोड़ रुपये है. लेकिन अब सिर्फ 310 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जो अस्पतालों तक पहुंचने में 1 महीना तक लग सकता है.
इतने लंबे समय में बकाया और भी बढ़ जाएगा, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है.
पुरानी बकाया राशि और ब्याज पर भी सवाल
IMA ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने बकाया पर 4% ब्याज देने का नियम बनाया है, लेकिन अभी तक इस पर कोई अमल नहीं हुआ है.
साथ ही, कई पिछले दावे और भुगतानों पर भी विवाद बना हुआ है, जिनकी रकम 50 से 100 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है.
2,900 करोड़ रुपये अब तक दिए
- सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, योजना शुरू होने से अब तक राज्य सरकार ने 2,900 करोड़ रुपये का भुगतान किया है.
- साल 2025-26 में 16 जुलाई 2025 तक 240.63 करोड़ रुपये की राशि अस्पतालों को दी गई है.
- फिर भी, SHA को 400 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं जो CGRMS 2.0 पोर्टल पर दर्ज की गई हैं. ये शिकायतें दावों की अस्वीकृति, भुगतान में देरी और तकनीकी गड़बड़ियों से जुड़ी हैं.
इलाज बंद करने के फैसले पर अंतिम मुहर आज
- बुधवार दोपहर की बैठक में स्वास्थ्य विभाग के एसीएस सुधीर राजपाल के साथ IMA के प्रतिनिधि मिलेंगे.
- इसके बाद शाम को पैनलबद्ध अस्पतालों के प्रमुखों की बैठक होगी, जहां यह तय होगा कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत इलाज जारी रहेगा या नहीं.
- IMA के रुख से साफ है कि अगर सरकार ने ठोस और समयबद्ध हल नहीं निकाला, तो हरियाणा के 675 निजी अस्पतालों में इलाज ठप हो सकता है, जिससे आम नागरिकों की परेशानी बढ़ जाएगी.
मरीजों की चिंता
- इस पूरे विवाद का सीधा असर आम मरीजों पर पड़ेगा, जो पहले से ही सरकारी अस्पतालों की लंबी कतारों और सीमित सुविधाओं से परेशान हैं.
- अगर निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज बंद कर देते हैं, तो गरीब मरीजों को इलाज कराना मुश्किल हो जाएगा.
- अब सबकी निगाहें सरकार और IMA की आज की बैठकों पर टिकी हैं. समाधान होगा या संकट गहराएगा — ये आने वाले घंटे तय करेंगे.















