home page

गाजियाबाद की इस कॉलोनी में रहने वाले हजारो लोगों की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा मकानों से जुड़ा ये काम पड़ा है अटका

दिल्ली और नोएडा से सटे गाजियाबाद के खोड़ा में मकान नंबरों को आवंटित करने और पते की समस्या को हल करने का प्रयास फिलहाल अधूरा है।
 | 
Ghaziabad Khoda Colony

दिल्ली और नोएडा से सटे गाजियाबाद के खोड़ा में मकान नंबरों को आवंटित करने और पते की समस्या को हल करने का प्रयास फिलहाल अधूरा है। लोगों का कहना है कि उनकी समस्या अब तक हल नहीं हुई है और पूछने पर कोई जवाब नहीं मिलता है। हालाँकि, अब नए सिरे से प्रस्ताव तैयार बनाने की प्रक्रिया शुरू की बात की जा रही है।

50 हजार से अधिक घरों वाली खोड़ा एक अनियोजित कॉलोनी है। यहाँ हजारों दुकानें भी हैं। यहां के लोगों को पानी और सीवर के साथ पते की भी समस्या है। चार साल पहले, कई संस्थाओं की मांग पर खोड़ा के मकान-दुकान को पते देने की योजना बनाई गई। केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह और साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा ने मार्च 2020 में इसका उद्घाटन किया था।

योजना थी कि खोड़ा को दस सेक्टरों में बांटकर प्रत्येक घर पर नंबर प्लेट लगाए जाएंगे। गूगल मैपिंग कराने के साथ दावा किया गया था कि काम तीन महीने में पूरा हो जाएगा,

लेकिन काम बीच में ही लटका रह गया था। खोड़ा रेजिडेंट्स एसोसिएशन (केआरए) के अध्यक्ष दीपक जोशी ने बताया कि डाक, डिलीवरी ब्वॉय और गैस सिलेंडर लोगों के घर तक नहीं पहुंच पाते हैं। कई बार तो लोगो के रिश्तेदार भी रास्ता भूल जाते हैं और उन्हें रास्ता बताने वाला भी कोई नहीं मिलता है।

काम नए सिरे से हो रहा शुरू

हिंद स्वाभिमान फॉउंडेशन के अध्यक्ष कल्लू भैया ने कहा कि नंबर प्लेट लगाने का काम जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए। खोड़ा-मकनपुर नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी शालिनी गुप्ता के ट्रांसफर के बाद एक अधिकारी ने बताया कि नए सिरे में नंबर प्लेट लगाने का प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इस पर अगली बोर्ड बैठक में चर्चा की जाएगी।

टेंडर के बिना काम शुरू कराया

नंबर प्लेट लोगों के घरों पर लगाने वाली एक कंपनी पर आरोप लगाया गया कि वह बिना टेंडर के ही काम कर रही है और प्लेट लगाने के एवज में 200 रुपये ले रही है।

जब ये आरोप लगाए गए, तब तक अक्टूबर 2022 में 10 हजार घरों पर नंबर प्लेट लगाए जा चुके थे।कहा गया कि हर घर से फर्म द्वारा 200 रुपये वसूली की जाएगी और कि काम नियमानुसार ही चल रहा है।

फिर काम शुरू हुआ, लेकिन 500 मकानों पर नंबर प्लेट लगाने के बाद काम रुक गया और जांच शुरू हुई। आज तक, खोड़ा के पते के साथ इस जांच रिपोर्ट का पता नहीं चल पाया है।