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सबसे खराब ट्रैफिक की लिस्ट में सबसे टॉप पर है भारत का ये शहर, शाम होते ही कछुए की स्पीड से चलता है ट्रैफिक

देश के सभी बड़े शहरों में ट्रैफिक की रफ्तार लगातार चर्चा का विषय बनी रहती है। यह समस्या सिर्फ भारत में नहीं है
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list of worst traffic

देश के सभी बड़े शहरों में ट्रैफिक की रफ्तार लगातार चर्चा का विषय बनी रहती है। यह समस्या सिर्फ भारत में नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में बड़े शहरों में गाड़ियों की भीड़ और सड़कों के लिए सिमटती जगह ने ट्रैफिक की रफ़्तार पर रोक लगा दी है।

एक शोध रिपोर्ट (Global Traffic Report) के अनुसार, ब्रिटेन की राजधानी लंदन को 2023 में वाहनों के लिए सबसे धीमा शहर घोषित किया गया था।

लंदन में गाड़ियों की रफ़्तार होती है इतनी

लंदन में व्यस्त समय में गाड़ी की औसत रफ्तार केवल 14 किमी. प्रति घंटा थी। इसकी सूचना नीदरलैंड की जियोलोकेशन टेक्नोलॉजी कंपनी टॉमटॉम (TomTom) ने पिछले महीने की एक रिपोर्ट में दी है।

इसमें भारत के दो शहर भी सबसे धीमे शहरों की लिस्ट में शामिल हैं। बेंगलुरु और पुणे भी सबसे ट्रैफिक वाले शहरों में शामिल हैं।

इन शहरों में 10 किलोमीटर की यात्रा करने में लगता है इतना समय

सूची में बेंगलुरु ने हर 10 किलोमीटर में औसत 28 मिनट और 10 सेकंड की यात्रा समय के साथ छठा स्थान हासिल किया है। पुणे ने इसी दूरी के लिए 27 मिनट 50 सेकंड के यात्रा समय के साथ सातवां स्थान हासिल किया है।

इन शहरों में इस तारीखों को था सबसे ज्यादा जाम

रिपोर्ट के अनुसार, 27 सितंबर बेंगलुरु की यात्रा के लिए सबसे बुरा दिन था। 10 किलोमीटर की यात्रा यहाँ उस दिन औसत समय 32 मिनट में तय की गयी थी। 8 सितंबर को पुणे को बहुत भीड़ का सामना करना पड़ा, जिससे समान दूरी तय करने में लगभग 34 मिनट लगे।

शहरों में ट्रैफिक की रफ़्तार कम हो रही है

TomTom ने 2023 में 55 देशों में 387 शहरों में ट्रैफिक रुझान की सूचना दी थी। 60 करोड़ से अधिक इन-कार नेविगेशन सिस्टम और स्मार्टफोन्स के डेटा के अनुसार इस टैफिक इंडेक्स को बनाया गया है।

टॉमटॉम हर शहर के लिए 2023 में पूरे नेटवर्क में लाखों किलोमीटर की दूरी तय करने में लगने वाले समय से प्रति किलोमीटर औसत यात्रा समय की गणना करता है। 2023 का रुझान अधिकांश शहरों की औसत गति में कमी की पुष्टि करता है।

पेट्रोल और ईंधन का खर्च

मोटर चालकों का बजट लंबी यात्राओं के कारण पेट्रोल और ईंधन की लागत में बढ़ोतरी से प्रभावित होता है। इससे 2021 और 2023 के बीच 60 प्रतिशत से अधिक शहरों में ईंधन का औसत बजट 15 प्रतिशत या अधिक बढ़ा है। खपत में इस वृद्धि से प्रति वाहन औसत CO2 उत्सर्जन सीधा प्रभावित होती है।