Cow Breed: भारत में देसी गायों की कई ऐसी नस्लें हैं, जो न सिर्फ अधिक दूध देती हैं बल्कि कठोर मौसम और स्थानीय परिस्थितियों में आसानी से ढल जाती हैं. सही नस्ल का चयन किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है. यहां हम बता रहे हैं 6 बेहतरीन देसी गायों के बारे में, जो दूध उत्पादन में सबसे आगे हैं.
गिर गाय – भरोसेमंद दूध देने वाली
गिर नस्ल की गाय अपनी ज्यादा दूध देने की क्षमता के लिए जानी जाती है. यह गाय एक दिन में लगभग 10 से 12 लीटर दूध दे सकती है. गिर गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान है. गुजरात और राजस्थान के कई हिस्सों में यह नस्ल किसानों की पहली पसंद है.
साहिवाल गाय – मौसम की मार झेलने वाली
साहिवाल नस्ल की गाय प्रतिदिन लगभग 10 से 16 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है. इसकी खासियत यह है कि यह कठोर मौसम में भी आसानी से ढल जाती है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई किसान साहिवाल गाय को दूध उत्पादन के लिए सबसे भरोसेमंद मानते हैं.
राठी गाय – गर्मी और सर्दी में बेहतर प्रदर्शन
राठी गाय को दूध के पालन के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. यह नस्ल सामान्यत: 7 से 12 लीटर दूध प्रतिदिन देती है. राजस्थान और हरियाणा के गर्म और सूखे क्षेत्रों में भी यह आसानी से रह सकती है, जिससे किसानों को मौसम की चुनौतियों से राहत मिलती है.
लाल सिंधी गाय – भरपूर दूध देने वाली
लाल सिंधी नस्ल की गाय गहरे लाल रंग की होती है और यह 12 से 20 लीटर दूध प्रतिदिन देने में सक्षम होती है. इसके दूध में वसा की मात्रा अधिक होती है, जो बाजार में ज्यादा दाम दिलाती है. यह नस्ल खासतौर पर सिंध, राजस्थान और गुजरात में लोकप्रिय है.
कांकरेज गाय – कम खर्च में अच्छा उत्पादन
कांकरेज गाय एक दिन में लगभग 6 से 10 लीटर दूध देती है. यह नस्ल मेहनती और मजबूत मानी जाती है, जो खेतों में काम के साथ-साथ दूध उत्पादन के लिए भी कारगर है. गुजरात और राजस्थान के किसान इसे अपनी बहुउपयोगी गाय मानते हैं.
थारपारकर गाय – हर मौसम में ढलने वाली
थारपारकर नस्ल की गाय प्रतिदिन लगभग 10 से 15 लीटर दूध देने की क्षमता रखती है. यह नस्ल गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में सहजता से रह सकती है. राजस्थान के थार क्षेत्र में पाई जाने वाली यह गाय अब देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय हो रही है.
किसानों के लिए सही चुनाव का महत्व
किसान यदि अपनी जरूरत, जलवायु और चारे की उपलब्धता के अनुसार सही नस्ल चुनें, तो दूध उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं. इन नस्लों में से कई को पालन-पोषण में कम खर्च आता है और वे लंबी उम्र तक उत्पादन देती हैं.