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राजस्थान पुलिस ने बंद करवाए ढाई लाख SIM और पौने दो लाख IMEI नंबर, इन तरीको से लोगों के साथ हो रही ठगी

कोरोना के बाद साइबर ठगी (Cyber Fraud) ने राजस्थान में अपने पंख फैला लिए हैं, जिससे यह क्षेत्र देश में साइबर ठगी का मुख्य केंद्र बन गया है।
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कोरोना के बाद साइबर ठगी (Cyber Fraud) ने राजस्थान में अपने पंख फैला लिए हैं, जिससे यह क्षेत्र देश में साइबर ठगी का मुख्य केंद्र बन गया है। पहले जहां झारखंड का जामताड़ा (Jamtara) इस तरह की गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध था, अब मेवात (Mewat) का इलाका इसमें अग्रणी हो गया है।

मेवात जो कि राजस्थान और हरियाणा (Haryana) में फैला है, अब साइबर ठगी का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। इस बढ़ती समस्या के चलते पुलिस ने बड़े पैमाने पर सिम कार्ड (SIM Cards) और आईएमईआई नंबर्स (IMEI Numbers) को ब्लॉक किया है।

मेवात बना साइबर ठगी का नया अड्डा

मेवात के ठगों ने पिछले दो वर्षों में देश के लगभग बीस राज्यों (20 States) के लोगों को अपना शिकार बनाया है। इस स्थिति ने विभिन्न राज्यों की पुलिस को राजस्थान लोकेशन सर्च (Location Search) के लिए आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर फैलाए गए भ्रामक विज्ञापनों (Misleading Advertisements) और सूचनाओं के जरिए ये ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने में सफल रहे हैं।

सोशल मीडिया है ठगी का नया माध्यम

भरतपुर रेंज के आईजी राहुल प्रकाश (Rahul Prakash) ने बताया कि सोशल मीडिया पर दिए जाने वाले विज्ञापन और रील्स (Reels) लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए आसान उपाय बन गए हैं। इस तरह की ठगी में शुरुआती रकम से लेकर धीरे-धीरे बड़ी रकम तक की मांग की जाती है।

सिम और आईएमईआई नंबरों पर पुलिस की कार्रवाई

राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police) ने ठगी के इस बढ़ते जाल को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। असम (Assam), ओडिशा (Odisha), और पश्चिम बंगाल (West Bengal) से आए प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्डों की भरमार के खिलाफ पुलिस ने बड़े पैमाने पर सिम और आईएमईआई नंबरों को ब्लॉक किया है।

ओटीपी शेयर न करें

बैंक अधिकारियों (Bank Officials) और अफसरों ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपने ओटीपी (OTP) को बेहद सोच-समझकर शेयर करें। अगर ओटीपी शेयर नहीं किया जाता है, तो फ्रॉड (Fraud) से बचने की संभावना 70 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।