विदेशी तकनीक की मदद से भारत की सड़के होगी चकाचक, NHAI की नई तकनीक से सड़के अपने आप करेगी खुद को रिपेयर

By Vikash Beniwal

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भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। हर दिन सड़कों पर होने वाली असंख्य दुर्घटनाओं में अनेक लोग अपनी जान गंवा देते हैं। इसका एक मुख्य कारण सड़कों पर मौजूद गड्ढे और असमान सतह होती है। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने अध्ययन और शोध की पहल की है।

भारतीय सड़कों की विशालता

भारत में सड़क परिवहन सबसे प्रमुख यातायात का साधन है। यहाँ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है जिसका प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण करता है। इस विस्तृत नेटवर्क के बावजूद सड़कों की बड़ी संख्या में खराबी यातायात के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न करती है।

टूटी-फूटी सड़कों की मरम्मत

भारत में कई राजमार्ग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं जिससे यातायात में बाधा और दुर्घटनाओं में वृद्धि होती है। इसके निवारण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सड़कों की मरम्मत और पुनर्वास के लिए गहन अध्ययन कर रहा है ताकि सड़कें खुद-ब-खुद अपनी मरम्मत कर सकें।

आधुनिक डामर टेक्नोलॉजी का प्रयोग

अगर डामर की नई तकनीकी से सड़कें बनाई जाएंगी तो उनकी मरम्मत स्वयं हो सकेगी। इससे सड़कों पर उत्पन्न गड्ढे अपने आप भर जाएंगे और सड़कों की उम्र बढ़ेगी। यह टेक्नोलॉजी विशेष रूप से पिटमैन नामक टार मिश्रित बजरी के मिश्रण का उपयोग करती है जो क्षति होने पर स्वयं की मरम्मत कर सकती है।

आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण

हालांकि, इस नए प्रकार के डामर की लागत और लंबे समय प्रभावों को लेकर अभी भी शोध जारी है। इसके अलावा इसका उपयोग हवाई अड्डों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर किया जा रहा है जिससे इसकी प्रभावशीलता का पता चल सकेगा। यह डामर सामान्य डामर की तुलना में अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होने का वादा करता है।

Vikash Beniwal

मेरा नाम विकास बैनीवाल है और मैं हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला हूँ. मैं पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया पर राइटर के तौर पर काम कर रहा हूं. मुझे लोकल खबरें और ट्रेंडिंग खबरों को लिखने का अच्छा अनुभव है. अपने अनुभव और ज्ञान के चलते मैं सभी बीट पर लेखन कार्य कर सकता हूँ.