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जाने शादी के बाद कैसे बनवा सकते है Marriage Certificate, जाने किन जगहों पर बहुत काम आता है मैरिज सर्टिफिकेट

भारत में विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक स्थान रखता है, जिसे कानूनी मान्यता प्रदान करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट का होना अत्यंत आवश्यक है।
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भारत में विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक स्थान रखता है, जिसे कानूनी मान्यता प्रदान करने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट का होना अत्यंत आवश्यक है। यह सर्टिफिकेट न केवल दो व्यक्तियों के बीच हुए विवाह का प्रमाण पत्र होता है, बल्कि इसे विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी कामों में भी प्रयोग किया जाता है। चाहे वह व्यक्ति किसी भी धर्म या समाज का क्यों न हो, विवाह के बाद मैरिज सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य है।

मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया

मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने की प्रक्रिया काफी सरल है। मैरीड कपल को अपने निकटतम सरकारी कार्यालय या ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होता है। इस प्रक्रिया में कुछ जरूरी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, शादी के फोटोग्राफ्स आदि जमा करने होते हैं। आवेदन के सफल अप्लाई होने के बाद दंपति को एक निश्चित तारीख पर रजिस्ट्रार के सामने उपस्थित होने का निर्देश दिया जाता है।

मैरिज सर्टिफिकेट का महत्व

मैरिज सर्टिफिकेट का उपयोग अनेक स्थानों पर होता है। पासपोर्ट बनवाने, जॉइंट अकाउंट खुलवाने, वीजा आवेदन करने, तलाक लेने, घरेलू मामलों में FIR दर्ज कराने और विधवा महिलाओं के लिए योजनाओं का लाभ उठाने में इसकी आवश्यकता होती है। इसके अलावा यह सर्टिफिकेट वैवाहिक संबंधों की कानूनी मान्यता का भी प्रमाण होता है।

देरी से मैरिज सर्टिफिकेट बनवाने पर क्या करें?

मुख्य रूप से शादी के 1 महीने के अंदर मैरिज सर्टिफिकेट बनवा लेना चाहिए। हालांकि कुछ कारणों से अगर आप ऐसा नहीं कर पाए हैं, तो भी आपके पास 5 साल तक का समय होता है, जिसमें आप अतिरिक्त फीस देकर सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं। 5 साल के बाद भी अगर आप सर्टिफिकेट नहीं बनवा पाए हैं, तो जिला रजिस्ट्रार से विशेष अनुमति प्राप्त करके इसे बनवाया जा सकता है।