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भारत के इस शहर में मिलती है सबसे सस्ती कीमत पर शराब की बोत्तल, कीमत ऐसी की कई होटल का पानी भी लगेगा महंगा

भारत में शराब (Alcohol) के रेट का विषय बेहद रुचिकर और चर्चित है। इसके पीछे की मुख्य वजह है देश की अनेको टैक्स नीतियाँ (Tax Policies) जो राज्यों के आधार पर अलग-अलग होती हैं।
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भारत के इस शहर में मिलती है सबसे सस्ती शराब? कई होटल की चाय भी इससे महंगी है

भारत में शराब (Alcohol) के रेट का विषय बेहद रुचिकर और चर्चित है। इसके पीछे की मुख्य वजह है देश की अनेको टैक्स नीतियाँ (Tax Policies) जो राज्यों के आधार पर अलग-अलग होती हैं। चलिए इस विषय पर विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि कैसे भारत में शराब के रेट तय किए जाते हैं।

शराब पर टैक्स की व्यवस्था

जीएसटी (GST) के बाहर रहने के कारण भारत में शराब पर टैक्स की व्यवस्था काफी जटिल है। प्रत्येक राज्य सरकार (State Government) अपनी अलग एक्साइज पॉलिसी (Excise Policy) के आधार पर शराब के रेट तय करती है। इससे देशभर में शराब के दामों में भारी अंतर पैदा होता है।

गोवा में शराब के रेट

गोवा (Goa) जो अपनी आकर्षक एक्साइज पॉलिसी के लिए जाना जाता है, वहां शराब के रेट अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम हैं। इसका मुख्य कारण है टैक्स में छूट (Tax Relief) और टूरिज्म (Tourism) को बढ़ावा देने की नीति।

रेट में अंतर का कारण

शराब के रेट में यह अंतर न केवल राज्यों की नीतियों के कारण है बल्कि ब्रांड और एल्कोहॉल के प्रकार (Alcohol Type) पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर एक ब्रांड की बीयर जो दिल्ली (Delhi) में 130 रुपये की होती है, वही गोवा में 90-100 रुपये में उपलब्ध हो सकती है।

गोवा की एक्साइज पॉलिसी

गोवा की एक्साइज पॉलिसी (Excise Policy) में एल्कोहोल पर टैक्स अन्य राज्यों की तुलना में कम है, जिसका सीधा प्रभाव शराब के रेट पर पड़ता है। इसके अलावा गोवा में लिकर टेंडर (Liquor Tender) लेना भी ज्यादा मुश्किल नहीं है, जिससे वहां शराब की दुकानों की संख्या अधिक है और प्रतिस्पर्धा (Competition) के कारण रेट कम रखे जाते हैं।

टूरिज्म और शराब के रेट

गोवा में टूरिज्म की बढ़ती संख्या के साथ शराब के रेट कम रखे जाते हैं ताकि पर्यटकों (Tourists) को आकर्षित किया जा सके। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना है, जो गोवा की अर्थव्यवस्था (Economy) के लिए महत्वपूर्ण है।