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महज 50 साल में ही पूरा समुद्र ही हो गया गायब, खड़े रह गए जहाज और नाव

दुनिया भर के लोग जलवायु परिवर्तन और क्लाइमेट चेंज के खतरनाक प्रभावों का सामना कर रहे है। जनवरी 2024 में लगातार दो महीने तक वैश्विक तापमान सामान्य से अधिक रहा है
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The entire ocean disappeared in just 50 years

दुनिया भर के लोग जलवायु परिवर्तन और क्लाइमेट चेंज के खतरनाक प्रभावों का सामना कर रहे है। जनवरी 2024 में लगातार दो महीने तक वैश्विक तापमान सामान्य से अधिक रहा है। यह पहली बार है कि वैश्विक औसत तापमान 1.5 डिग्री से ऊपर चला गया है। लेकिन दशक से अधिक समय पहले, इस तरह के प्रभाव देखे गए थे की एक पूरा समुद्र गायब हो गया था।

2010 में सुख गया था ये सागर

2010 तक, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच स्थित अरल सागर सूख गया था। पूरे समुद्र को सूखने में महज 50 साल लगे थे। अरल सागर एक समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इनलैंड वाटर बॉडी हुआ करती थी। 68,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में ये फैला हुआ था। 1960 के दशक में सोवियत सिंचाई परियोजनाओं के चलते यह नदी सिकुड़ने की शुरुआत हुई थी।

रेगिस्तान में बने खेत पर सूख गया समुद्र

1960 के दशक में, सोवियत यूनियन ने कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के सूखे मैदानों पर सिंचाई के लिए एक बड़ा जल विनिमय परियोजना शुरू की थी। इस रेगिस्तान को कॉटन और अन्य फसलों की खेती के लिए दो बड़ी नदियों सिर दार्या (उत्तर) और अमू दार्या (दक्षिण) को जोड़ा गया था। लेकिन इसकी वजह से अरल सागर में पानी आना बंद हो गया था। इस प्रोजेक्ट ने सिंचाई को बेहतर किया, लेकिन सागर को बर्बाद कर दिया।

बचाने की कोशिश असफल रही

अरल सागर एक समय में उत्तर से दक्षिण की ओर लगभग 270 किलोमीटर और पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 290 किलोमीटर तक फैला था। लेकिन नदियों को बदलने के बाद इसमें कमी आती चली गई और धीरे-धीरे पूरा समुद्र ही गायब हो गया। इसके बावजूद, कजाकिस्तान ने अरल सागदर के उत्तरी और दक्षिणी भागों के बीच एक बांध बनाया था। लेकिन समुद्र को उसी स्वरूप में वापस लाना लगभग असंभव है। यह भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।