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ट्रेन चैन खिंचने के बाद रात में सही डिब्बे का कैसे लगाते है पता, जान लो क्या है पूरा माजरा

भारतीय रेलवे (Indian Railways) को अक्सर देश की जीवन रेखा कहा जाता है। प्रतिदिन लाखों यात्री इसके माध्यम से अपनी यात्रा करते हैं।
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 what happens when a train chain is pulled by a passenger

भारतीय रेलवे (Indian Railways) को अक्सर देश की जीवन रेखा कहा जाता है। प्रतिदिन लाखों यात्री इसके माध्यम से अपनी यात्रा करते हैं। रेलवे द्वारा यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाता है। फिर भी कई बार ट्रेन में यात्रा के दौरान चेन पुलिंग (Chain Pulling) की घटनाएं होती हैं, जिससे पूरी ट्रेन रुक जाती है। आइए जानते हैं चेन पुलिंग के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और कैसे इसके बारे में पता लगाया जाता है।

चेन पुलिंग की प्रक्रिया और उसके प्रभाव

जब ट्रेन में यात्रा के दौरान कोई व्यक्ति चेन पुलिंग करता है तो लोको पायलट (Loco Pilot) को इसका तुरंत पता चल जाता है। इसके बाद पायलट तीन बार हॉर्न (Horn) बजाता है, जिससे पीछे बैठे गार्ड को भी इसकी जानकारी हो जाती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि ट्रेन को सुरक्षित जगह पर रोका जा सके।

चेन अलार्म सिस्टम और चेन लाइन सिस्टम

ट्रेन के हर कोच में चेन अलार्म सिस्टम (Chain Alarm System) या चेन लाइन सिस्टम (Chain Line System) होता है। दिन के समय चेन पुलिंग की जानकारी देने के लिए चेन अलार्म सिस्टम काम में आता है, जबकि रात के समय चेन पुलिंग की जानकारी देने के लिए चेन लाइन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है।

गार्ड को कैसे चलता है पता

चेन पुलिंग होने पर ट्रेन के गार्ड (Train Guard) को यह पता लगाना होता है कि चेन किस कोच से खींची गई है। इसके लिए चेन का एक हिस्सा कोच के अंदर और दूसरा हिस्सा कोच के बाहर एक सॉकेट में फंसा होता है। जब चेन खींची जाती है, तो कोच के बाहर वाला हिस्सा सॉकेट से निकलकर लटक जाता है, जिससे गार्ड को चेन पुलिंग की जगह का पता चल जाता है।

रात के समय चेन पुलिंग का पता लगाना

रात के समय चेन पुलिंग होने पर कोच के बाहर की चेन लाइन सिस्टम की लाइट (Light) जल जाती है। इससे गार्ड को चेन पुलिंग के बारे में पता चल जाता है, और वह उस कोच में जाकर चेन पुलिंग करने वाले व्यक्ति को पकड़ सकता है।