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कभी सोचा है कि केवल पहाड़ी क्षेत्रों में ही क्यों होती है बर्फबारी, बर्फ को पिघलने में कितना लगता है टाइम

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी इलाकों में इस बार बर्फबारी का इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हुआ।
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जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी इलाकों में इस बार बर्फबारी का इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हुआ। मैदानी इलाके जो अक्सर सर्दियों में ठंडे होते हैं, इस बार पहाड़ी क्षेत्रों से भी ज्यादा ठंडे पाए गए। हालांकि पिछले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भारी बर्फबारी ने न सिर्फ सामान्य जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया बल्कि कई इलाकों में सड़क मार्ग भी बंद हो गए।

बर्फबारी की प्रक्रिया

बर्फबारी कैसे होती है, यह एक जिज्ञासा का विषय रहा है। सूर्य की गर्मी से उड़ती भाप जब वायुमंडल में ऊपर बढ़ती है और ऊपरी तापमान फ्रीजिंग पॉइंट पर होता है तो भाप बर्फ में बदल जाती है और भारी होकर नीचे की ओर आने लगती है। इस प्रक्रिया में वायुमंडल की विभिन्न परतों के तापमान में बदलाव और हवा की गति का बहुत महत्व होता है।

पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी

पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होने का मुख्य कारण समुद्र तल से इनकी ऊंचाई है। ऊंचाई के कारण यहां का वातावरण अधिकतर समय ठंडा रहता है, जो बर्फबारी के लिए अनुकूल स्थिति प्रदान करता है।

बर्फबारी के लिए नमी का महत्व

बर्फबारी के लिए वातावरण में नमी का होना जरूरी है। ठंडी हवा अधिक भाप को रोक सकती है और बर्फबारी के लिए आवश्यक हिमांक तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे होना चाहिए।

विभिन्न जगहों पर बर्फबारी की विविधता

बर्फबारी की विविधता उस जगह के मौसम और भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। कुछ जगहों पर बर्फ रुई जैसी होती है तो कहीं पर ठोस और पारदर्शी। बर्फबारी के बाद बर्फ की सतह का आकार और रंग भी बदल सकता है।

बर्फ का पिघलना

बर्फ का पिघलना विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जैसे कि वातावरण का तापमान, धूल और दूसरे कणों की उपस्थिति। तेज हवा और धूप बर्फ के पिघलने की स्पीड को बढ़ा सकती है।