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खुद की एक बीघा भी नही है जमीन और खेती से लाखों में है कमाई, यूपी के इन किसानों का बिजनेस आइडिया देखकर तो आप भी देंगे शाबाशी

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित कमधेनवा गांव (Kamdhenwa Village) आज एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
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Profit from vegetable farming

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित कमधेनवा गांव (Kamdhenwa Village) आज एक अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यहां के किसान, जिनके पास खुद की जमीन नहीं है, वे भी सब्जी की खेती (Vegetable Farming) करके सालाना चार लाख रुपये तक

की आमदनी (Income) हासिल कर रहे हैं। यह कहानी न केवल तेजबहादुर और नाथू साहनी जैसे किसानों की है बल्कि इसी तरह कई भूमिहीन किसानों की भी है, जो किराये की जमीन पर सब्जी उगाकर अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।

खेती का नया दौर

कमधेनवा गांव में खेती की परंपरागत तकनीकों को छोड़कर किसानों ने सब्जी उत्पादन (Vegetable Production) की ओर रुख किया है। यहां के खेत कभी खाली नहीं रहते और पूरे साल विभिन्न प्रकार की सब्जियां उगाई जाती हैं। गोभी, बैंगन, करेला, गाजर, शलजम, नेनुआ और भिंडी जैसी सब्जियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन इस गांव की पहचान बन चुका है।

बाजार की मजबूत पकड़

कमधेनवा गांव की सब्जियां न केवल उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विभिन्न जिलों में बल्कि बिहार (Bihar) के गोपालगंज, सिवान और पश्चिमी चंपारण तक भी सप्लाई की जाती हैं। इसकी क्वालिटी और डिमांड के कारण व्यापारी सुबह होते ही यहां पहुंच जाते हैं और खरीदारी के लिए लाइन लगाते हैं।

मशहूर है कमधेनवा की झम्मड़ वाली करैली

विशेष रूप से कमधेनवा की झम्मड़ वाली करैली (Bitter Gourd) बहुत मशहूर है। इसे उगाने की अनूठी तकनीक और इसके उत्पादन की गुणवत्ता के कारण इसकी बड़ी मांग है। यहां तक कि व्यापारी फसल की खरीदारी के लिए किसानों को एडवांस में भुगतान करते हैं।

सब्जी खेती से सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन

कमधेनवा गांव की सफलता ने आसपास के गांवों के किसानों को भी प्रेरित किया है। अब वे भी सब्जी की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस खेती ने किसानों को न केवल आर्थिक संपन्नता दी है बल्कि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा (Education) के अवसर भी प्रदान किए हैं।