home page

यूपी में लिफ्ट और एस्कलेटर के इस्तेमाल को लेकर बिल्डरों को लेनी होगी स्पेशल परमिसन, इस जगह कराना होगा रेजिस्ट्रेशन

यूपी में निजी और सार्वजनिक स्थानों पर लिफ्ट या एस्कलेटर लगाने वाले बिल्डरों को अब लिफ्ट में यात्रा करने वाले लोगों के जोखिम को कवर करने के लिए बीमा कराना पड़ेगा
 | 
Lift and Escalator Bill

यूपी में निजी और सार्वजनिक स्थानों पर लिफ्ट या एस्कलेटर लगाने वाले बिल्डरों को अब लिफ्ट में यात्रा करने वाले लोगों के जोखिम को कवर करने के लिए बीमा कराना पड़ेगा। दुर्घटना होने पर उन्हें मुआवजा देना होगा। पीड़ित व्यक्ति को सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा लिप्ट स्वामी को देना होगा। अगर संचालक मुआवजा देने में देरी करती है

तो उसकी वसूली राजस्व बकाये की भांति की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश लिफ्ट एंड एस्कलेटर विधेयक-2024’ में यह प्रावधान किया गया है। शनिवार को राज्य विधानसभा ने इस विधेयक को पास कर दिया गया है।

इसे नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने प्रस्तुत किया है। इस पर सपा सदस्यों ने विधेयक में कुछ बदलाव करने का प्रस्ताव दिया और कहा कि इसे अन्य सुझावों के साथ प्रवर समिति को भेजा जाए। सत्तापक्ष ने इस पर असहमति जताई, लेकिन विधेयक को पास कर दिया गया है।

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि अधिसूचित होने के बाद इसकी नियमावली बनाई जाएगी। इसमें कुछ अतिरिक्त प्रावधान किए जाएंगे। उनका कहना था कि अधिनियम लागू होने के छह महीने के भीतर पुरानी संचालित लिफ्ट और एस्कलेटर का पंजीकरण कराना ज़रूरी होगा।

सरकार द्वारा नियुक्त किए गए अधिकारी के यहां पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण शुल्क 1500 रुपये निर्धारित किया गया है।

पुरानी लिफ्ट के लिए 30 महीने का समय

विधेयक में प्रावधान किए गए हैं कि पुरानी लिफ्ट संचालकों को तकनीकी उपकरण संसाधन जुटाने के लिए तीस महीने का समय मिलेगा।

साथ ही, लिफ्ट और एस्कलेटर में आटो रेस्क्यू उपकरण होना अनिवार्य चाहिए। साथ ही संवाद प्रणाली, सीसीटीवी कैमरे, इंमरजेंसी घंटी और पर्याप्त रोशनी भी होनी चाहिए।

लिफ्ट आपरेटर का नंबर और आपातकालीन नंबर लिफ्ट के अंदर लगाना होगा। कितने लिफ्ट आपरेटर रखने होंगे इसके लिए नियम बनाए जाएंगे। लिफ्ट आपरेटरों का प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

रखरखाव के लिए वार्षिक कांट्रैक्ट

लिफ्ट चालक या मालिक को एक वर्ष में दो बार सुरक्षा के लिए माक ड्रिल करना होगा। इसके लिए वार्षिक अनुरक्षण भी आवश्यक होगा।

प्रति निर्धारित कार्यालय में वार्षिक सुरक्षा कंट्रैक्ट (AMC) जमा करना अनिवार्य होगा। मरम्मत करने वाली टीम को फिटनेस बुक में मरम्मत की तिथि दर्ज करनी होगी।

वहीं लिफ्ट का जीवनकाल भी बताना होगा। लिफ्ट या एस्कलेटर के कामकाज के दौरान किसी नियम का उल्लंघन होने पर प्राधिकृत अधिकारी द्वारा नोटिस भेजा जाएगा।

यदि सुधार नहीं किया गया, पंजीकरण निरस्त करने की कड़ी कार्रवाई अधिकारी द्वारा की जाएगी। इस बंदीकरण के दौरान लिफ्ट और एस्कलेटर बंद रहेंगे।

दुर्घटना होने पर थाने को 24 घंटे में सूचित करना होगा

लिफ्ट चालक को 24 घंटे के अंदर स्थानीय थाने या प्राधिकृत अधिकारी को सूचित करना होगा। घटनाओं की जांच डीएम और कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी।

अगर किसी नियम का उल्लंघन हुआ और मजिस्ट्रेट द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद भी उसे ठीक नहीं किया गया, तो लिफ्ट को निर्धारित समय सीमा के बाद बंद कर दिया जायेगा।

अपवाद स्वरूप, राज्य सरकार इस अधिनियम या उसके अधीन बने नियमों में छूट दे सकेगी।