home page

ट्रेन चलाने से पहले लोको पायलट को देना पड़ता है ये खास टेस्ट, उसके बाद ही ट्रेन चलाने की मिलती है परमिशन

भारतीय रेलवे (Indian Railways) देश की जीवनरेखा मानी जाती है, जहां हर रोज हजारों ट्रेनें (Trains) संचालित होती हैं।
 | 
_Loco Pilot test before running the train

भारतीय रेलवे (Indian Railways) देश की जीवनरेखा मानी जाती है, जहां हर रोज हजारों ट्रेनें (Trains) संचालित होती हैं। इन ट्रेनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए लोको पायलट (Loco Pilots) की नियुक्ति की जाती है, जिन्हें विभिन्न खास

नियमों (Rules) और जिम्मेदारियों (Responsibilities) का पालन करना होता है। एक लोको पायलट के कंधों पर ट्रेन के इंजन (Engine) से लेकर पीछे के 24 डिब्बों तक की सुरक्षा और संचालन की भारी जिम्मेदारी होती है।

ठंड के महीनों में विशेष जिम्मेदारी

खासकर ठंड के महीनों (Winter Months) में लोको पायलट की जिम्मेदारियां और भी बढ़ जाती हैं। इस दौरान उन्हें ट्रेन के इंजन पर पूरी तरह कमांड (Command) रखने की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाती है। लेकिन किसी भी लोको पायलट को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए चुने जाने से पहले एक विशेष परीक्षा (Test) से गुजरना होता है।

लोको पायलट के लिए अनिवार्य टेस्ट

हर लोको पायलट को ब्रेथ एनालाइजर (Breath Analyzer) जांच से गुजरना होता है। इस जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि लोको पायलट ने शराब (Alcohol) का सेवन तो नहीं किया है। अगर जांच में यह पाया जाता है कि लोको पायलट ने ड्यूटी (Duty) पर जाने से 8 घंटे पहले भी शराब का सेवन किया है, तो उसे ड्यूटी पर नहीं जाने दिया जाता। यह टेस्ट न सिर्फ ट्रेन में बैठने से पहले बल्कि उतरने के बाद भी लिया जाता है।

सुरक्षा और संचालन की गारंटी

यह प्रक्रिया भारतीय रेलवे की सुरक्षा (Safety) और संचालन (Operation) की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोको पायलट का यह टेस्ट न केवल यात्रियों (Passengers) की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है बल्कि रेल संचालन में उच्चतम मानकों (High Standards) को बनाए रखने में भी सहायक है।