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Bee Farming: पारंपरिक खेती को छोड़ मधुमक्खी पालन से कर रहे तगड़ी कमाई, इस जगह ले सकते है ट्रेनिंग

कोटा जिले के एक विशिष्ट किसान, नरेंद्र मालव ने पारंपरिक खेती की बाधाओं को पार करते हुए मधुमक्खी पालन में अपार सफलता हासिल की है।
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कोटा जिले के एक विशिष्ट किसान, नरेंद्र मालव ने पारंपरिक खेती की बाधाओं को पार करते हुए मधुमक्खी पालन में अपार सफलता हासिल की है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त ट्रेनिंग के बाद, मधुमक्खी पालन को अपने जीवन का मुख्य आधार बनाया।

विविधतापूर्ण शहद का उत्पादन 

नरेंद्र मालव ने अपनी खेती में विविधता लाते हुए, विभिन्न प्रकार के शहद का उत्पादन किया है। उनके शहद में सरसों, धनिया, जंगली जड़ी बूटियां और सौंफ जैसे विभिन्न फ्लेवर शामिल हैं, जिन्हें सीजन के हिसाब से तैयार किया जाता है।

आर्थिक उन्नति 

शुरुआती दौर में मालव ने मधुमक्खी पालन के लिए केवल 25 से 50 बॉक्स लगाए थे, लेकिन आज उनकी कमाई 25 लाख रुपए सालाना तक पहुंच गई है। इस प्रक्रिया में उन्होंने 10 अन्य व्यक्तियों को रोजगार भी प्रदान किया है। 

मधुमक्खी पालन के लिए आदर्श 

कोटा जिले में सरसों और धनिया की फसलों की भरमार के कारण, मधुमक्खी पालन के लिए आठ महीने तक का सीजन उपलब्ध होता है। इस क्षेत्र की विशेषता ने मालव को मधुमक्खी पालन में विशेष सफलता दिलाई है।