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इस एयरपोर्ट के नजदीक के 7 गांवों की जमीनों की खरीद बेच पर लगी रोक, कीमतों में आया तगड़ा उछाल

वर्तमान में Varanasi Airport से सटे सात गांवों की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। चिन्हित गांवों में जमीन की रजिस्ट्री करने के लिए उप जिलाधिकारी पिंडरा से अनुमति लेनी होगी
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वर्तमान में Varanasi Airport से सटे सात गांवों की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। चिन्हित गांवों में जमीन की रजिस्ट्री करने के लिए उप जिलाधिकारी पिंडरा से अनुमति लेनी होगी। यही कारण है कि एयरपोर्ट से सटे गांव में रहने वाले लोगों की चिंता बढ गयी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी एयरपोर्ट से सटे कई गांव हैं, जिनमें सगुनहा, घमहापुर, करमी, बैकुंठपुर, मंगारी, रघुनाथपुर और बसनी शामिल हैं। इन सभी गांवों में जमीन खरीदने और बेचने पर रोक लगा दी गई है। भूमि क्रय-विक्रय करने के लिए एसडीएम की अनुमति चाहिए होगी।

सोमवार को करमी गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में एसडीएम वित्त संजय कुमार ने ग्रामीणों के साथ एक बैठक की। एसडीएम पिंडरा अंशिका दीक्षित, एसएलओ मीनाक्षी पांडेय और पिंडरा तहसील के सभी रजिस्टर भी बैठक में शामिल थे।

किसानों ने करि उचित मुआवजे की मांग

किसानों ने बैठक में कहा कि भूमि का सीमांकन सही तरीके से नहीं हुआ है। किसानों ने यह भी कहा कि सही सीमांकन के बाद सभी किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

भूमि अधिकार का एक बैठक में कुछ किसानों ने दबे स्वर पर विरोध किया। लेकिन उपस्थित अधिकारियों ने राजस्व विभाग की टीम को किसानों से मिलकर भूमि अधिग्रहण पर सहमति बनाने के लिए कहा गया।

857 किसानों की जमीन होगी अधिग्रहित

बड़े विमानों के लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए वाराणसी एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई बढ़ाई जानी है। भूमि कम होने की वजह से रनवे की लंबाई नहीं बढ़ाई जा सकती है। ऐसे में एयरपोर्ट के आसपास किसानों की जमीन ली जानी है।

भूमि अधिग्रहण 2015 में शुरू हुआ था और कुछ वर्षों तक कागजी प्रक्रिया ही चलती रही. 2015 में फिर सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन किसानों ने इसका विरोध किया। पिछले दिनों किसानों की सहमति के बाद सीमांकन का काम पूरा हुआ था।

पहले फेज में वाराणसी एयरपोर्ट पर लगभग 290 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जाएगी। बताया जा रहा है कि वाराणसी हवाई अड्डे से सटे गांव के 857 किसानों की भूमि अधिग्रहित की जानी है। हालाँकि, भूमि की खरीद और बिक्री पर रोक लगाए जाने के बाद किसान काफी परेशान है।