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टमाटर-प्याज के बाद इस सब्जी की बढ़ती कीमतों ने उड़ाई सबकी नींद, 200 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंची कीमतें

बिहार में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश (Continuous Rain) का दौर जारी है, जिसने जनजीवन को न केवल प्रभावित किया है बल्कि सब्जियों की कीमतों (Vegetable Prices) में भी ज़बरदस्त बढ़ोतरी कर दी है।
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टमाटर-प्याज के बाद इस सब्जी की बढ़ती कीमतों ने उड़ाई सबकी नींद

बिहार में पिछले कई दिनों से लगातार बारिश (Continuous Rain) का दौर जारी है, जिसने जनजीवन को न केवल प्रभावित किया है बल्कि सब्जियों की कीमतों (Vegetable Prices) में भी ज़बरदस्त बढ़ोतरी कर दी है। खासकर राजधानी पटना (Patna) में सब्जियों के दामों में अचानक आई इस बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ (Financial Burden) डाला है।

बारिश और महंगाई के एकसाथ दोहरी मार

गुरुवार शाम को सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी (Price Hike) ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि प्रकृति के असंतुलन का सीधा प्रभाव आम आदमी की थाली पर पड़ता है। विशेष रूप से हरी सब्जियां (Green Vegetables) जो आमतौर पर हर किसी की पहुंच में होती हैं, अब लगभग गायब हो चुकी हैं।

जितिया पर्व के बीच कीमतों में इजाफा

व्यापारियों (Traders) का कहना है कि जितिया पर्व (Jitiya Festival) के कारण भी सब्जियों की मांग में इजाफा हुआ है, जिसने कीमतों में उछाल (Price Surge) ला दिया है। इसके अलावा लगातार बारिश के कारण मंडियों में सब्जियों की आवक (Supply) पर भी असर पड़ा है, जिससे कीमतों में 10 से 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।

सब्जियों की बढ़ती कीमतें

पटना के स्थानीय सब्जी दुकानदारों (Local Vegetable Vendors) ने बताया कि फूलगोभी (Cauliflower), टमाटर (Tomato) और नेनुआ (Sponge Gourd) जैसी सब्जियों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम आदमी की रसोई पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

नवरात्र के दौरान कीमतों में बढ़ोतरी

विशेषज्ञों (Experts) का मानना है कि नवरात्र (Navratri) के दौरान सब्जियों की मांग में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कीमतों में और इजाफा हो सकता है। इस दौरान सरपुतिया (Ridge Gourd) जैसी सब्जियों की कीमतें बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसने खरीदारों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

किसानों के सामने चुनौतियां

खराब मौसम (Bad Weather) के कारण किसानों (Farmers) को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के कारण सब्जियों के फूल झड़ गए हैं और कई फसलें खेतों में ही खराब हो गई हैं, जिससे उत्पादन (Production) में गिरावट आई है।