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भारत का एक ऐसा गांव जहां नही होती किसी की शादी, नही बनाते दो मंजिला मकान और जमीन पर सोते है लोग

चौंधला छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका में स्थित एक छोटा परंतु अपनी अनूठी परंपराओं (Unique Traditions) के लिए प्रसिद्ध गांव है।
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marriage does not take place

चौंधला छत्रपति संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका में स्थित एक छोटा परंतु अपनी अनूठी परंपराओं (Unique Traditions) के लिए प्रसिद्ध गांव है। यहां के ग्रामीण वर्षों से चली आ रही रीति-रिवाजों का सम्मान करते हैं, जिनमें शादियों से लेकर घरों की संरचना तक शामिल है।

शादियों की अनोखी परंपरा

इस गांव की सबसे विशेष बात यह है कि यहां कोई भी शादी (No Weddings) गांव के अंदर नहीं होती। यह परंपरा इस विश्वास पर आधारित है कि गांव की देवी कुंवारी हैं और उनके सम्मान में गांव में कोई शादी नहीं की जाती। इस परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा (Mythological Story) भी है, जिसके अनुसार देवी को एक राक्षस से विवाह करने के लिए मजबूर किया गया था।

घरों की विशेष बनावट

चौंधला गांव में आपको किसी भी घर में दूसरी मंजिल (No Second Floor) नहीं मिलेगी। इसका कारण यह है कि ग्रामीण चाहते हैं कि उनके घर देवी के मंदिर से ऊंचे न हों। यह परंपरा गांव में सालों से चली आ रही है और इसका पालन सभी करते हैं।

जीवनशैली में देवी का सम्मान

गांव के ग्रामीण अपने जीवन के हर पहलू में देवी का सम्मान करते हैं। इसलिए आपको गांव में किसी भी घर में बाज या पलंग (No Beds) नहीं मिलेंगे, क्योंकि मान्यता है कि देवी बाज पर सोती हैं। इसी तरह नवजात शिशुओं को भी जमीन पर सुलाया जाता है। यह सभी प्रथाएं ग्रामीणों की गहरी आस्था (Deep Faith) और परंपरा के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं।

देवी बरसोसे की पूजा और ग्रामीणों की आस्था

गांव के पुजारी प्रकाश वानोळे के अनुसार देवी बरसोसे (Devi Barsose) की पूजा यहां के लोग वर्षों से करते आ रहे हैं। मंदिर सभी के लिए खुला है और यहां कोई भी दर्शन के लिए आ सकता है। इस गांव की परंपरा और रीति-रिवाज किसी लिखित इतिहास (Written History) में नहीं मिलते, लेकिन पूर्वजों द्वारा मौखिक रूप से पारित किए गए हैं।