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भारत का ऐसा स्कूल जहां घंटी बजते ही जंगल की तरफ दौड़ते है बच्चे, कारण जानकर तो आप भी करेंगे तारीफ

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के कसेकेरा गांव में स्थित इस विद्यालय में एक अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। यहां स्कूल की घंटी बजते ही बच्चे कक्षाओं से निकलकर जंगल की ओर दौड़ पड़ते हैं।
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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के कसेकेरा गांव में स्थित इस विद्यालय में एक अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। यहां स्कूल की घंटी बजते ही बच्चे कक्षाओं से निकलकर जंगल की ओर दौड़ पड़ते हैं। यह कोई खेल का समय नहीं बल्कि उनकी 'नेचर क्लास' का समय होता है। इस गांव के स्कूल में पढ़ाई का तरीका पूरी तरह से प्रकृति पर आधारित है।

प्रकृति के माध्यम से शिक्षा

कक्षा 6वीं से 10वीं तक के बच्चे यहां प्रकृति के साथ मिलकर अपनी पढ़ाई करते हैं। शिक्षक उन्हें मैथ्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी, फिजिक्स जैसे विषयों के साथ ही औषधीय पौधों (Medicinal Plants) के बारे में भी जंगल में ही शिक्षा देते हैं। बच्चों को मैथ्स के विभिन्न टॉपिक्स पौधों और पहाड़ों के माध्यम से समझाया जाता है. वहीं फिजिक्स और केमिस्ट्री में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग शिक्षा के लिए किया जाता है।

प्राकृतिक शिक्षा पद्धति के फायदे

इस तरह की प्राकृतिक शिक्षा पद्धति के कई फायदे हैं। बच्चे न केवल अपने विषयों को बेहतर समझ पाते हैं, बल्कि उनमें प्रकृति के प्रति समझ और प्यार भी बढ़ता है। इससे उनका बौद्धिक विकास (Intellectual Development) भी अच्छा होता है। इस तरह की शिक्षा प्रणाली से बच्चे न सिर्फ अकादमिक ज्ञान हासिल करते हैं, बल्कि उन्हें जीवन के लिए आवश्यक प्रैक्टिकल नॉलेज (Practical Knowledge) भी मिलती है।

शिक्षा का नया आयाम

कसेकेरा गांव का यह स्कूल न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे भारत के लिए एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत करता है। यहां की शिक्षा पद्धति दिखाती है कि कैसे प्रकृति को अपनी शिक्षा का हिस्सा बनाकर बच्चों को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान किया जा सकता है। यह स्कूल शिक्षा के नए आयाम (New Dimensions of Education) को उजागर करता है और यह दिखाता है कि प्रकृति के साथ मिलकर कैसे बच्चों को अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षित किया जा सकता है।