पशुपालकों के लिए इस नस्ल की भैंसे नही है किसी वरदान से कम, डेयरी प्रॉडक्ट्स की मार्केट में रहती है तगड़ी डिमांड

By Sunil-Beniwal

Published on:

आज के समय में जब हम भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास की बात करते हैं, तो दूध उत्पादन एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर कर सामने आता है। गांवों में जहां खेती के साथ-साथ पशुपालन भी जीविका का एक प्रमुख साधन है, वहां दूध और दूध से बने प्रॉडक्ट्स की डिमांड निरंतर बढ़ रही है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए, कई लोगों ने पशुपालन को अपनाया है और विशेषकर भैंस के दूध की उत्पादन में अपनी रुचि दिखाई है।

कालाहांडी भैंस की खासियत

ऐसी ही एक भैंस है कालाहांडी भैंस, जिसका नाम उसके उत्पत्ति स्थल के नाम पर पड़ा है। यह भैंस विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और उड़ीसा के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। इस भैंस की खासियत यह है कि यह अपने जीवनकाल में 7-8 बार बच्चे देती है और प्रत्येक बार में हाई क्वालिटी का दूध उत्पन्न करती है। इसका रंग अमूमन काला या भूरा होता है और इसकी सींघ से घरेलू सामान भी बनाया जाता है।

भैंस की देखभाल और आवश्यकताएँ

यदि आप कालाहांडी भैंस का पालन करना चाहते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि इसे सही तरीके से खिलाना और देखभाल करना होगा। इस भैंस को उसकी शारीरिक आवश्यकतानुसार ही खाना देना चाहिए। इसे अत्यधिक भोजन देने से इसके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इस भैंस को उचित मात्रा में कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन और विटामिन युक्त आहार देना चाहिए।

पशुपालन के फायदे

पशुपालन न केवल आपको अच्छी आय प्रदान करता है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। कालाहांडी जैसी भैंसें अपनी ज्यादा दूध उत्पादन क्षमता के कारण अत्यधिक डिमांड में हैं। इस प्रकार की भैंसों का पालन करके किसान न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं, बल्कि लोकल मार्केट्स में दूध की आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकते हैं।