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राजस्थान के इस शहर का एक कीड़े के कारण नीला हो गया था रंग, विदेशों में भी खूब है चर्चे

भारत के राजस्थान राज्य में स्थित जोधपुर अपनी अद्भुत विरासत (Heritage), प्राचीन इतिहास (History) और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है।
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भारत के राजस्थान राज्य में स्थित जोधपुर अपनी अद्भुत विरासत (Heritage), प्राचीन इतिहास (History) और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए प्रसिद्ध है। इसे सूर्यनगरी (Sun City) के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खासियत इसका नीला रंग (Blue Color) है, जिसके कारण इसे देश-विदेश में ब्ल्यू सिटी

(Blue City) के नाम से पहचाना जाता है। इतिहासकार जहूर खां मेहर के अनुसार जोधपुर की शुरुआती बसाहट में इमारतों को कीड़े से बचाने के लिए नीले रंग का पुताई (Painting) किया गया था। यह ना सिर्फ एक अनूठी पहचान प्रदान करता है बल्कि गर्मी से भी राहत प्रदान करता है।

जल संचयन प्रणाली की ऐतिहासिक झलक

जोधपुर की जल संचयन प्रणाली (Water Harvesting System) अपने आप में एक कलाकृति है। तूअरजी का झालरा, गुलाब सागर, सैकड़ों बावड़ियां (Stepwells) और कुएं इसकी हाईटेक प्लानिंग का प्रमाण हैं। यहाँ की नहरी सिस्टम (Canal System) ने पहाड़ियों से निकलने वाले पानी को संग्रहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह जल संरक्षण की एक अनोखी विधा है जो पानी के सतत उपयोग को सुनिश्चित करती है।

नीले रंग की ऐतिहासिक परंपरा

जोधपुर के नीले रंग (Blue Colour) की शुरुआत एक हैरतंअगेज़ कहानी से जुड़ी है। प्राचीन समय में जब सीमेंट का प्रचलन नहीं था, तब गारे और मिट्टी (Mud) से चुनाई की जाती थी। एक विशेष प्रकार के कीड़े के कारण इमारतें कमजोर हो जाती थीं, जिसे रोकने के लिए चूने में नीले रंग की मिलावट की जाने लगी। यह परंपरा (Tradition) न सिर्फ इमारतों को सुरक्षित रखती थी बल्कि गर्मी से भी राहत प्रदान करती थी।

सांस्कृतिक विरासत और बसावट

मेहरानगढ़ किले (Mehrangarh Fort) के आस-पास की बसावट में जोधपुर की सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) की झलक मिलती है। यहाँ की आबादी का वितरण उनके पेशे और सामाजिक स्थिति के अनुसार हुआ करता था। ब्राह्मण, महाजन और सुनार जैसी जातियाँ अपनी-अपनी जरूरतों और कार्यों के अनुसार विभाजित थीं। यह संरचना न सिर्फ सामाजिक व्यवस्था को दर्शाती है बल्कि शहर की सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करती है।

छीतर पत्थर और ब्ल्यू सिटी की परंपरा

1929 में जोधपुर में छीतर पत्थर (Chittar Stone) का चलन शुरू हुआ, जिससे ब्ल्यू सिटी की थीम में बदलाव आया। छीतर पत्थर की खोज ने शहर के निर्माण कला में एक नई दिशा प्रदान की। इसने जोधपुर की वास्तुकला (Architecture) और समृद्धि (Prosperity) को नए आयाम प्रदान किए। इस पत्थर का उपयोग करने से न केवल शहर की सौंदर्यता में वृद्धि हुई बल्कि इसने जोधपुर को भी ऐतिहासिक पहचान दिलवाई.