Bagless Day Jharkhand : झारखंड सरकार ने राज्य के स्कूली शिक्षा में एक अहम बदलाव की पहल की है। अब प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे हर शनिवार को बिना बैग के स्कूल आएंगे। इस दिन न तो पाठ्यपुस्तकें लाई जाएंगी और न ही पढ़ाई होगी। इसके बजाय खेल-कूद, प्रोजेक्ट, पेंटिंग और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसे ‘बैगलेस डे’ का नाम दिया गया है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने दिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश
राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को बैगलेस डे की योजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इस कदम से बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास होगा। बच्चों को पढ़ाई से एक दिन की राहत मिलेगी और वे अन्य रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लेकर नई सीख प्राप्त कर सकेंगे।
अन्य राज्यों से मिली प्रेरणा, अब झारखंड में होगा लागू
गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले से ही ‘नो बैग डे’ लागू है। गुजरात में इसे 5 जुलाई से हर शनिवार, जबकि उत्तराखंड में हर महीने के अंतिम शनिवार को लागू किया गया है। अब झारखंड भी इसी रास्ते पर चलते हुए कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कूलों में इसे लागू करेगा। इससे छात्रों को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने और जीवन कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।
मोबाइल फोन के कारण घट रही फिजिकल एक्टिविटी: मंत्री
शिक्षा मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में बच्चे पढ़ाई के बाद घर लौटकर मोबाइल में उलझ जाते हैं। इसके कारण उनका शारीरिक खेल-कूद लगभग खत्म होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अभिभावक भी जिम्मेदार हैं जो बच्चों को मोबाइल दे देते हैं लेकिन उनकी फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान नहीं देते। बैगलेस डे से इस स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
पहले के स्कूलों में होती थी पीटी, अब फिर से आएगी खेल की संस्कृति
रामदास सोरेन ने कहा कि पहले के समय में सरकारी स्कूलों में अंतिम घंटा पीटी यानी फिजिकल ट्रेनिंग का होता था, जिसमें नियमित रूप से खेल-कूद, दौड़ और अन्य शारीरिक गतिविधियां कराई जाती थीं। इससे बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होते थे। अब बैगलेस डे के माध्यम से इस पुरानी शिक्षा पद्धति को आधुनिक रूप में फिर से लागू किया जाएगा।
राज्य स्तर पर बनेगा फिजिकल एक्टिविटी कैलेंडर
बैगलेस डे को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए राज्य स्तर से एक ‘फिजिकल एक्टिविटी कैलेंडर’ तैयार किया जाएगा। जैसे पढ़ाई के लिए एक सिलेबस होता है, वैसे ही हर शनिवार के लिए तय गतिविधियों की सूची बनाई जाएगी। इसमें शामिल हो सकते हैं:
- योग और व्यायाम
- पेंटिंग और कला कार्य
- सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत
- इंडोर गेम्स जैसे शतरंज, कैरम आदि
- आउटडोर गेम्स जैसे कबड्डी, दौड़, फुटबॉल आदि
- प्रोजेक्ट कार्य और समूह चर्चा
इससे न सिर्फ बच्चों की क्रिएटिव थिंकिंग बढ़ेगी बल्कि वे टीमवर्क, अनुशासन और लीडरशिप जैसे गुण भी सीख सकेंगे।
वोकेशनल शिक्षा में पहले से लागू है बैगलेस डे का प्रारूप
झारखंड सरकार पहले से ही वोकेशनल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए साल में 10 दिन बैगलेस डे मना रही है। इन दिनों में मास्टर ट्रेनर द्वारा स्कूली बच्चों को विभिन्न व्यवसायिक क्षेत्रों की जानकारी दी जाती है। साथ ही उन्हें प्रैक्टिकल स्किल्स और रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन भी मिलता है। अब उसी विचार को नियमित रूप से हर शनिवार को लागू किया जाएगा।
बच्चों के लिए बनेगा स्कूल आने का नया अनुभव
बैगलेस डे की अवधारणा से बच्चों को हर शनिवार स्कूल आने का एक नया और उत्साहजनक कारण मिलेगा। सिर्फ पढ़ाई की बजाय बच्चों को कुछ नया करने और खुद को बेहतर तरीके से जानने का अवसर मिलेगा। यह उनके लिए तनाव मुक्त दिन होगा जो उनकी पढ़ाई को भी बेहतर बनाएगा।
शिक्षकों की भूमिका होगी अहम
बैगलेस डे को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्हें बच्चों को मार्गदर्शन देने, प्रेरित करने और गतिविधियों को सुनियोजित ढंग से आयोजित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है।















