IDBI Bank Sale Update : बैंक के निजीकरण को लेकर सरकार की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक इस डील को पूरा करने की संभावना जताई गई है।
गौरतलब है कि यह निजीकरण पिछले तीन वर्षों से प्रक्रिया में है। सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त हिस्सेदारी को रणनीतिक निवेशक को बेचा जाना है। इसके लिए पहले ही रुचि पत्र आमंत्रित किए जा चुके हैं।
कितनी हिस्सेदारी होगी बेची, कौन-कौन होंगे खरीदार?
सरकार ने अक्टूबर 2022 में एलआईसी के साथ मिलकर IDBI बैंक में कुल 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए निवेशकों से रुचि पत्र (EOI) मांगे थे।
इसमें शामिल है:
- भारत सरकार की 30.48% हिस्सेदारी
- एलआईसी की 30.24% हिस्सेदारी
इस हिस्सेदारी के लिए कई वित्तीय निवेशकों ने रुचि दिखाई थी। अब सरकार की ओर से शेयर खरीद समझौते (SPA) को अंतिम रूप देने की तैयारी है, जो चयनित बोलीदाताओं को दिया जाएगा।
डेटा रूम प्रक्रिया जारी, जल्द आमंत्रित होंगी वित्तीय बोलियां
सरकारी अधिकारी के अनुसार, फिलहाल डेटा रूम एक्सेस देने की प्रक्रिया जारी है, जिसमें संभावित बोलीदाताओं को बैंक से जुड़ी वित्तीय जानकारी दी जा रही है।
जैसे ही यह चरण पूरा होता है, सरकार की ओर से वित्तीय बोलियों (financial bids) को आमंत्रित किया जाएगा। अनुमान है कि अक्टूबर तक पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, और बैंक को एक रणनीतिक खरीदार सौंप दिया जाएगा।
सुरक्षा और RBI से मंजूरी मिल चुकी है
इस डील को लेकर सरकार ने पहले से ही आवश्यक मंजूरियां ले रखी हैं।
- संभावित खरीदार को गृह मंत्रालय (MHA) से सुरक्षा मंजूरी मिल चुकी है।
- वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी “फिट एंड प्रॉपर” मूल्यांकन को हरी झंडी दे दी है।
इन मंजूरियों के बाद अब केवल वित्तीय बोलियां और अंतिम समझौता ही बाकी रह गया है।
एयर इंडिया के बाद सबसे बड़ी रणनीतिक बिक्री
IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री, सरकार की विनिवेश नीति का दूसरा सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पहले एयर इंडिया की बिक्री एक महत्वपूर्ण निजीकरण पहल रही थी।
सरकार की योजना है कि इस बिक्री के माध्यम से न केवल सरकारी हिस्सेदारी कम की जाए, बल्कि बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और पेशेवर संचालन को भी बढ़ावा दिया जाए।
कितनी कमाई होगी सरकार को?
वित्त वर्ष 2025 में सरकार को DIPAM (निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग) के माध्यम से कुल ₹68,263 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसमें से ₹8,625 करोड़ रुपये सिर्फ विनिवेश से आए हैं।
अब वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार ने विनिवेश और एसेट मॉनेटाइजेशन के माध्यम से ₹47,000 करोड़ रुपये की आमदनी का लक्ष्य रखा है। IDBI की बिक्री से इसमें बड़ी हिस्सेदारी मिलने की संभावना है।
निवेशकों को क्यों है IDBI में दिलचस्पी?
IDBI बैंक हाल के वर्षों में NPA कंट्रोल, डिजिटल बैंकिंग में सुधार, और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के चलते निवेशकों के लिए एक लाभकारी अवसर बन चुका है।
सरकार की रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री से बैंक में:
- निजी पूंजी का प्रवेश होगा
- मैनेजमेंट अधिक प्रोफेशनल होगा
- और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी
आगे की दिशा क्या है?
IDBI बैंक की बिक्री सरकार की लंबे समय से चली आ रही विनिवेश रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है सरकारी दखल को सीमित करना और बाज़ार आधारित संरचना को बढ़ावा देना।
यदि अक्टूबर तक यह डील पूरी हो जाती है, तो यह केंद्र सरकार के लिए एक और बड़ी आर्थिक उपलब्धि होगी, जो आने वाले बजट और आर्थिक नीतियों को और मजबूती देगी।















