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हरियाणा में सामने आया 100 करोड़ का जमीन घोटाला, अफसरों की मिलीभगत से खरीदे गए लग्जरी फ्लैट

हरियाणा के सहकारिता विभाग में हुए 100 करोड़ रुपए के जमीन घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में सामने आया है कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा किसानों के लिए भेजे गए पैसे से करनाल। 
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Haryana Cooperative Department Scams

हरियाणा के सहकारिता विभाग में हुए 100 करोड़ रुपए के जमीन घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में सामने आया है कि केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा किसानों के लिए भेजे गए पैसे से करनाल, जीरकपुर रेवाड़ी में लग्जरी फ्लैट्स खरीदे गए. बता दें कि साल 2002 में सहकारिता विभाग को केंद्र ने 600 करोड़ रुपए किसानों के लिए जारी किये थे.

इसी राशि में घोटाले की बात सामने आई है. फ़िलहाल जगाधारी, कैथल, अंबाला में 11 एफआईआर एसीबी द्वारा दर्ज कराई जा चुकी है. गुरुग्राम में भी शुक्रवार देर रात एक टीम द्वारा रेड की गई. ACB के सूत्रों का कहना है कि 17-A की फाइल को सरकार के पास भेजा गया है.

एडिशनल डायरेक्टर होगी पूछताछ

सूत्रों से जानकारी मिली है कि जल्दी ही विभाग के एडिशनल डायरेक्टर नरेश गोयल को हिरासत में लेकर पूछ्ताछ की जा सकती है. ACB द्वारा गोयल के अलावा बाकी अफसरों पर भी केस दर्ज करने की मंजूरी मांगी गई है. इस खुलासे के बाद विभाग में सीनियर ऑडिटर सुमित अग्रवाल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.

जांच में सामने आया है की अधिकारियों और कर्मचारियों ने विभाग की ऑडिट ब्रांच के अधिकारियों से मिलीभगत करके ये घोटाला किया है. एसीबी द्वारा सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिक और उप मुख्य लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल को बर्खास्त करने की सिफारिश भी की गई है.

2021 में शुरू की गई थी योजना 

 सहकारिता विभाग द्वारा 2021 में चार वर्षीय एकीकृत सहकारी विकास परियोजना को लॉन्च किया गया था. किसानों को ट्रेनिंग, लोन, सोलर पंप, भंडार गृह तैयार करने जैसी सुविधाओं के लिए इस योजना को लॉन्च किया गया था. लेकिन आनन फानन में इस

चार वर्षीय योजना को इसी साल मार्च में खत्म करने का फैसला कर लिया गया. इसके 38 करोड़ रुपए वापस मंगवा लिए गए हैं. इसके अलावा वित्त विभाग से 48.71 करोड़ की राशि जो साल 2023-24 के लिए प्रस्तावित हुई थी उसे जारी न करने की भी सिफारिश कर दी गयी है.

2022 में हुई थी पहली शिकायत

साल 2022 में इस मामले में रेवाड़ी जिले को लेकर सबसे पहले शिकायत दर्ज की गई थी. तब इस मामले की जांच मुख्य सचिव द्वारा ACB को सौंप दी गई थी. तब जांच में सामने आया था की आरोपियों द्वारा सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया था.

एक ही कंपनी से कंप्यूटर, बैटरी, कैमरे खरीदे गए लेकिन कागजों पर उन्होंने ट्रेनिंग पर खर्चा दिखाया था. इस मामले में 14 अधिकारियों और कर्मचारियों पर केस दर्ज हुआ था. इसके बाद कैथल और करनाल तक जांच पहुंची और फिलहाल  पानीपत, गुरुग्राम, सोनीपत की भी जांच की जा रही है.

रिमांड पर कैथल कैथल के AR

इस मामले में जितेंद्र कौशिक जो कैथल सरकारी समिति के सहायक रजिस्ट्रार हैं, पर 2021-22 में आइसीडीपी की 40 लाख रुपए की ग्रांट में घोटाले के आरोप लगाए गए हैं और उन्हें ACB ने 2 दिन के रिमांड पर लिया है. उन्होंने सामान खरीद के फर्जी बिल तैयार किये. ACB अधिकारियों का कहना है कि संभावना है कि घोटाले की राशि 100 करोड़ रुपए से भी अधिक हो.

अब तक ये हो चुके हैं गिरफ्तार

अभी तक इस मामले में शामिल 6 राजपत्रित अधिकारियों, ICDP रेवाड़ी के 4 अन्य अधिकारियों और 4 निजी व्यक्तियों की गिरफ्तारी हो चुके है. इनमें ऑडिट ऑफिसर बलविंदर, डिप्टी चीफ ऑडिटर योगेंद्र अग्रवाल, जिला रजिस्टर सहकारी समिति करनाल रोहित गुप्ता.

सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समिति अनु कोशिश, रामकुमार, जितेंद्र कौशिक , कृष्ण बेनीवाल और इसी विभाग के ICDP रेवाड़ी के लेखाकार सुमित अग्रवाल, डेवलपमेंट अधिकारी नितिन शर्मा और विजय सिंह शामिल हैं. इसके अलावा स्टालिन जीत, नताशा कौशिक, सुभाष और रेखा को गिरफ्तार किया है.

ACB के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि रिश्वत माँगने वाले अधिकारी या कर्मचारी की जानकारी हरियाणा ACB के टोल फ्री नंबर 1800-180-2022 और 1064 पर दें.