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Haryana Internet Update: हरियाणा के इन 7 जिलों में इंटरनेट सेवा फिर से हुई बहाल, 11 फरवरी को किसान आंदोलन के चलते लगी थी पाबंदी

हरियाणा में किसान आंदोलन (Farmer Protest) के चलते पिछले कुछ दिनों से बंद इंटरनेट सेवा (Internet Service) को आज से फिर से बहाल कर दिया गया है।
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हरियाणा में किसान आंदोलन (Farmer Protest) के चलते पिछले कुछ दिनों से बंद इंटरनेट सेवा (Internet Service) को आज से फिर से बहाल कर दिया गया है। इस निर्णय से अंबाला (Ambala), कुरुक्षेत्र (Kurukshetra), कैथल (Kaithal), जिंद (Jind), हिसार (Hisar), फतेहाबाद (Fatehabad), और सिरसा (Sirsa) जिलों के निवासी एक बार फिर इंटरनेट का उपयोग कर पाएंगे। इस आंदोलन के कारण, सुरक्षा कारणों से 11 फरवरी को इन सेवाओं को बंद कर दिया गया था।

सुरक्षा और संचार पर प्रभाव

सुरक्षा (Security) के मद्देनजर और आंदोलन के प्रभाव को कम करने के लिए, सरकार ने मोबाइल इंटरनेट (Mobile Internet), बल्क एसएमएस (Bulk SMS), और डोंगल सेवाओं (Dongle Services) को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा, धारा 144 (Section 144) को भी लगभग 11 जिलों में लागू किया गया था, जिससे बड़े समूहों के एकत्रित होने पर रोक लग सके।

फैसले के पीछे की वजह

किसानों के 'दिल्ली मार्च' (Delhi March) को स्थगित करने के बाद, पुलिस ने सिंघु (Singhu), टिकरी (Tikri), और गाजीपुर (Ghazipur) बॉर्डर पर सर्विस रोड्स को भी खोल दिया। यह निर्णय आंदोलन की तीव्रता में कमी और सार्वजनिक सुरक्षा (Public Safety) की बेहतर स्थिति को देखते हुए लिया गया।

किसानों की मांगें और आगे की रणनीति

किसान नेता (Farmer Leaders) बताते हैं कि प्रदर्शनकारी 29 फरवरी तक प्रदर्शन स्थलों पर डटे रहेंगे। इस दौरान, गतिरोध (Deadlock) को खत्म करने के लिए किसान नेताओं और सरकार के बीच वार्ता (Negotiations) जारी रहेगी। किसान स्वामीनाथन आयोग (Swaminathan Commission) की सिफारिशों के क्रियान्वयन, पेंशन (Pension), बिजली दरों (Electricity Rates), और लखीमपुर खीरी हिंसा (Lakhimpur Kheri Violence) के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

संचार और सुरक्षा की ओर एक कदम

इस फैसले से हरियाणा के निवासियों में एक नई उम्मीद जगी है। इंटरनेट सेवा (Internet Connectivity) की बहाली से न केवल संचार (Communication) में सुधार होगा बल्कि आर्थिक गतिविधियाँ (Economic Activities) भी सामान्य हो पाएंगी। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद (Dialogue) को बढ़ावा देने के लिए यह एक सकारात्मक कदम है।