हरियाणा में लाखों परिवारों के BPL कार्ड रद्द, फैमिली आइडी के कारण हुई कार्रवाई

By Uggersain Sharma

Published on:

Haryana BPL Card Cancellation : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां राज्य सरकार ने अचानक 6.36 लाख परिवारों को BPL (गरीबी रेखा से नीचे) श्रेणी से बाहर कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों में भ्रम और आक्रोश का माहौल है। सरकार की दलील है कि इन परिवारों की सालाना आय 1.80 लाख रुपये से अधिक हो गई है और इनके नाम मंहगी गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है।

चार महीने में 52 लाख से घटकर 46 लाख रह गई संख्या

जानकारी के अनुसार, चार महीने पहले प्रदेश में BPL श्रेणी के परिवारों की संख्या लगभग 52 लाख थी, जो अब घटकर लगभग 46 लाख रह गई है। यानी 6.36 लाख परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इन परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और ये अब गरीबी रेखा से ऊपर आ चुके हैं।

सरकार का तर्क: आय और संपत्ति बढ़ने के कारण हटाया गया

सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन परिवारों को BPL सूची से बाहर किया गया है, उनकी वार्षिक आय ₹1.80 लाख से अधिक पाई गई। साथ ही इन परिवारों के नाम पर महंगे चारपहिया वाहन, ट्रैक्टर या अन्य संपत्तियां दर्ज हैं। इसी आधार पर उन्हें गरीबी रेखा से ऊपर की श्रेणी में डाल दिया गया है।

बिना सर्वे के बढ़ा दी गई आय, दर्ज हो गई गाड़ियां!

हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई प्रभावित परिवारों ने दावा किया है कि सरकार ने बिना किसी सर्वे या सत्यापन के उनकी आय में वृद्धि दर्ज कर दी है।

इसके अलावा, कई मामलों में परिवारों के पास दोपहिया वाहन भी नहीं हैं, लेकिन फैमिली ID में मंहगी कार या ट्रैक्टर दर्ज कर दिए गए हैं। इन परिवारों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कोई वाहन नहीं खरीदा, लेकिन रिकॉर्ड में गलत एंट्री की गई है।

राशन लेने पहुंचे तो पता चला कार्ड रद्द हो गया

प्रभावित परिवारों के अनुसार, उन्हें BPL कार्ड रद्द होने की जानकारी तब मिली, जब वे राशन लेने पहुंचे। वहां से बताया गया कि अब वे BPL लाभार्थी नहीं रहे, क्योंकि उनके नाम पर बड़ा वाहन रजिस्टर्ड है।

यह जानकारी सुनकर कई परिवारों को गहरा झटका लगा, क्योंकि उन्होंने कभी कोई वाहन नहीं खरीदा, और अब राशन व सरकारी योजनाओं से वंचित हो गए हैं।

फैमिली ID में गड़बड़ी की आशंका, जांच की मांग

इन मामलों के सामने आने के बाद अब फैमिली ID सिस्टम में गड़बड़ी की गंभीर आशंका जताई जा रही है। प्रभावितों ने मांग की है कि सरकार इन मामलों की जांच कराए और सत्यापन के बिना की गई एंट्रियों को ठीक किया जाए।

यह भी सवाल उठ रहे हैं कि बिना जमीनी सर्वेक्षण के कैसे किया गया फैसला, और डेटा एंट्री में पारदर्शिता क्यों नहीं रखी गई।

राजनीतिक माहौल में हुआ अचानक बदलाव

जानकारों का कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक दृष्टिकोण से भी चर्चा का विषय बन गया है।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच BPL सूची में पांच लाख परिवारों का इजाफा हुआ था। लेकिन तीसरी बार प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद, अब उसी सूची से 6 लाख से ज्यादा परिवारों को बाहर कर दिया गया है, जो संदेह पैदा कर रहा है।

गरीबों को योजनाओं से वंचित करने का आरोप

सरकार की इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों का कहना है कि अब वे BPL लाभार्थियों को मिलने वाली योजनाओं – जैसे कि फ्री राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति, उज्ज्वला योजना, स्वास्थ्य बीमा आदि – से वंचित हो जाएंगे।

इससे उनका जीवन और कठिन हो जाएगा, क्योंकि वास्तव में वे अभी भी गरीबी रेखा के नीचे ही जीवन गुजार रहे हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल, मांगी जवाबदेही

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि सरकार डेटा के नाम पर गरीबों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है। कई नेताओं ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाने और जांच की मांग की है।

सरकार को चाहिए पारदर्शिता और पुनः सत्यापन

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को चाहिए कि वह पुनः सर्वे कराकर सही लाभार्थियों की सूची तैयार करे। अगर सिस्टम में कोई तकनीकी त्रुटि है तो उसे जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को योजनाओं का लाभ मिल सके।

Uggersain Sharma

Uggersain Sharma is a Hindi content writer from Sirsa (Haryana) with three years of experience. He specializes in local news, sports, and entertainment, adept at writing across a variety of topics, making his work versatile and engaging.