Vodafone Idea: वोडाफोन आइडिया लिमिटेड पिछले कुछ समय से वित्तीय समस्याओं का सामना कर रही है. कंपनी पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है. जिसमें डेफर्ड स्पेक्ट्रम पेमेंट और एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) देनदारी शामिल हैं. 30 जून 2024 तक के डेटा के अनुसार कंपनी पर सरकार का 2.09 लाख करोड़ रुपये बकाया है. इनमें से 1.39 लाख करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम पेमेंट के मद में हैं. जबकि 70,320 करोड़ रुपये AGR देनदारी के रूप में हैं.
सरकार की हिस्सेदारी और उसकी रणनीति
वोडाफोन आइडिया में सरकार की हिस्सेदारी 33 फीसदी है, जो कि कंपनी के बकाया ब्याज को इक्विटी में बदलने के बाद प्राप्त हुई है. इस हिस्सेदारी के चलते सरकार अब कंपनी में एक प्रमुख पब्लिक शेयरहोल्डर बन गई है. हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार अपनी इस हिस्सेदारी को सॉवरेन वेल्थ फंड्स को बेचने पर विचार कर रही है.
हालांकि वोडाफोन आइडिया के सीईओ अक्षय मूंदड़ा ने इस मामले में कहा कि कंपनी की इस पर सरकार से कोई बातचीत नहीं हुई है. सरकार अपने निवेश के बारे में स्वयं निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है और यह पूरी तरह से उसका नीतिगत मामला है.
AGR देनदारी पर कोर्ट का आदेश और क्यूरेटिव याचिका
AGR देनदारी को लेकर वोडाफोन आइडिया ने कोर्ट के एक पुराने आदेश के खिलाफ क्यूरेटिव याचिका दायर की है. इस मामले में कंपनी को कोर्ट की खुली सुनवाई का इंतजार है. कंपनी को उम्मीद है कि इस मामले में कुछ राहत मिल सकती है. जिससे उसकी वित्तीय स्थिति में सुधार आ सकता है. हालांकि इस याचिका के परिणाम का कंपनी के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है.
वोडाफोन आइडिया के शेयर का प्रदर्शन
वोडाफोन आइडिया के शेयरों का प्रदर्शन भी हाल के समय में उतार-चढ़ाव भरा रहा है. 3.37 फीसदी की गिरावट के साथ कंपनी के शेयर 15.47 रुपये पर आ गए हैं. हालांकि पिछले छह महीनों में कंपनी के शेयरों में 5 फीसदी का उछाल देखा गया है और पिछले एक साल में इसने निवेशकों को 90 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है. यह दिखाता है कि निवेशकों का कंपनी पर विश्वास अभी भी बना हुआ है. लेकिन वित्तीय समस्याओं का समाधान कंपनी के लिए महत्वपूर्ण होगा.














