Bakrid 2024: इस नस्ल के बकरे की मार्केट में रहती है तगड़ी डिमांड, थोड़ी सी मेहनत से आप हो सकते है मालामाल

By Sunil-Beniwal

Published on:

Bakrid 2024: बकरीद इस्लामी कैलेंडर का एक प्रमुख त्योहार है जिसमें बकरों की कुर्बानी दी जाती है। यह प्रथा सदियों पुरानी है और आज भी बड़ी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। त्योहार के दो महीने पहले से ही बाजार बकरों से भर जाते हैं और इस दौरान बकरों की उच्च नस्ल की बड़ी मांग होती है।

बकरीद का आर्थिक पहलू

बकरीद के मौके पर बकरों की कुर्बानी के लिए अच्छी नस्ल के तंदरुस्त बकरों की मांग सबसे ज्यादा होती है। इस समय बकरों को बेचने वाले व्यापारियों को काफी अच्छा मुनाफा होता है। जानकार बताते हैं कि इस सीजन में बकरा पालने वालों को भी अच्छा लाभ होता है जिससे यह धारणा कि बकरा पालन सिर्फ गांव-देहात में ही संभव है गलत साबित होती है।

शहरी क्षेत्रों में बकरा पालन

केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र, मथुरा के अनुसंधान के मुताबिक शहरी इलाकों में भी बकरा पालन संभव है। इन्हें खूंटे से बांधकर या छत पर व आंगन में भी पाला जा सकता है। इस तरीके से बकरा पालने पर भी अच्छी नस्ल के बकरे बड़े हो सकते हैं और बकरीद पर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

शहरी नस्ल के बकरों की खासियत

सीआईआरजी के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. एमके सिंह के अनुसार, बरबरी नस्ल के बकरे और बकरियां शहरी नस्ल के अंतर्गत आते हैं। ये बकरे छोटे स्थान में भी पाले जा सकते हैं और अगर इन्हें अच्छा चारा दिया जाए तो इनका वजन काफी तेजी से बढ़ता है।

फार्म में बकरा पालन

सीआईआरजी के डॉ. गोपाल दास के मुताबिक फार्म में रखकर बकरों को पालने पर भी उनका वजन अच्छी तरह बढ़ता है। बरबरी, सिरोही और सोजत नस्ल के बकरे और बकरियों को फार्म में स्टाल फीडिंग से पाला जा सकता है जिससे उनका वजन तेजी से बढ़ता है।

स्पेशल पैलेट्स फीड

सीआईआरजी के फीड एक्सपर्ट डॉ. रविंद्र का कहना है कि अब बकरों के लिए विशेष पैलेट्स फीड तैयार किया गया है, जिसे उन्हें खिलाने पर उनकी सभी पोषण संबंधी आवश्यकताएं पूरी होती हैं। इस फीड को देने से बकरों की बढ़ोतरी और स्वास्थ्य में सुधार होता है और इसे आसानी से घर पर या फार्म में पाला जा सकता है।